संख्या 6 + √2 है और √2 अपरिमेय है।
6 + √2 अपरिमेय है।
व्यंजक को परिमेय मानकर चलेंगे। यदि इससे ज्ञात अपरिमेय वर्गमूल (Square root) परिमेय निकल आए, तो हमारी धारणा गलत होगी। इसे विरोधाभास विधि कहते हैं।
परिमेय संख्या और अपरिमेय संख्या का योग या अंतर अपरिमेय होता है। गैर-शून्य परिमेय संख्या और अपरिमेय संख्या का गुणनफल भी अपरिमेय होता है।
मान लें 6 + √2 = r, जहाँ r परिमेय है।
√2 = r − 6। दो परिमेयों का अंतर परिमेय होता है।
इससे √2 परिमेय निकला, जबकि √2 अपरिमेय है। अतः 6 + √2 अपरिमेय है।
परिमेय मानने पर विरोध मिलता है; अतः 6 + √2 अपरिमेय है।