मैग्नीशियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है, यानी उसके बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन हैं और वह समूह 2 में आता है।
एक ही समूह के तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्रॉन समान होते हैं, इसलिए उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं।
उत्तर: कैल्सियम और बेरियम। चयन का आधार यह है कि तीनों समूह 2 के तत्व हैं और तीनों के बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन हैं।
बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन वाले तत्व समूह 1 में आते हैं।
दो इलेक्ट्रॉन वाले समूह 2 में और पूर्ण बाहरी कोश वाले समूह 18 में।
उत्तर: (a) लीथियम, सोडियम और पोटैशियम; (b) मैग्नीशियम और कैल्सियम; (c) हीलियम, निऑन और आर्गन।
पहले दस तत्व हैं: हाइड्रोजन, हीलियम, लीथियम, बेरिलियम, बोरॉन, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फ्लुओरीन और निऑन।
इनमें लीथियम समूह 1 का और बेरिलियम समूह 2 का तत्व है—दोनों सारणी के बाईं ओर हैं, जहाँ धातुएँ होती हैं।
उत्तर: लीथियम और बेरिलियम—ये दो धातुएँ पहले दस तत्वों में हैं।
Ga, Ge, As और Se एक ही आवर्त में बाएँ से दाएँ इसी क्रम में आते हैं, और आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक अभिलक्षण घटता है।
इसलिए इन चारों में गैलियम सबसे अधिक धात्विक है।
Be समूह 2 में तो है, पर दूसरे आवर्त में सबसे ऊपर है, और समूह में ऊपर जाने पर धात्विकता घटती है।
उत्तर: गैलियम (Ga) में सबसे अधिक धात्विक अभिलक्षण है।
आधुनिक सारणी का आधार परमाणु द्रव्यमान नहीं, बल्कि परमाणु संख्या है।
समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है, इसलिए वे अब एक ही स्थान पर आ जाते हैं और वह विसंगति समाप्त हो गई।
कोबाल्ट और निकैल जैसे जोड़ों का क्रम भी अपने आप सही हो गया, क्योंकि कोबाल्ट की परमाणु संख्या 27 और निकैल की 28 है।
उत्तर: परमाणु संख्या को आधार बनाने से समस्थानिकों तथा क्रम-भंग दोनों की समस्याएँ दूर हो गईं।
लीथियम का विन्यास 2, 1; सोडियम का 2, 8, 1 और पोटैशियम का 2, 8, 8, 1 है।
तीनों के बाहरी कोश में एक-एक इलेक्ट्रॉन है, जिसे त्यागकर वे आसानी से धनायन बना लेते हैं—इसीलिए तीनों जल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन मुक्त करती हैं।
हीलियम का विन्यास 2 है और निऑन का 2, 8; दोनों का बाहरी कोश पूर्ण रूप से भरा है।
उत्तर: (a) हाँ, तीनों के बाहरी कोश में एक-एक इलेक्ट्रॉन है। (b) हाँ, दोनों का बाहरी कोश पूर्ण है, इसलिए उन्हें न इलेक्ट्रॉन लेने की जरूरत है न देने की—यही उनकी अक्रियाशीलता का कारण है।