नाइट्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 5 है और फ़ॉस्फ़ोरस का 2, 8, 5।
नाइट्रोजन में दो कोश हैं और फ़ॉस्फ़ोरस में तीन, इसलिए नाइट्रोजन का परमाणु साइज़ छोटा है।
छोटे साइज़ के कारण नाभिक बाहरी इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से खींचता है और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक रहती है।
उत्तर: नाइट्रोजन अधिक ऋण विद्युत है, क्योंकि समूह में ऊपर होने से उसका साइज़ छोटा और नाभिकीय खिंचाव अधिक है।
परमाणु में जितने कोश होते हैं, तत्व उतने ही आवर्त में आता है।
बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या से तत्व का समूह तय होता है।
इसीलिए एक ही समूह के तत्वों के संयोजकता इलेक्ट्रॉन समान होते हैं और उनके रासायनिक गुण भी समान रहते हैं।
उत्तर: कोशों की संख्या आवर्त बताती है और संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समूह—यही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और स्थिति का संबंध है।
कैल्सियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 8, 2 है, यानी उसके बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन हैं और वह समूह 2 में आता है।
परमाणु संख्या 12 वाला मैग्नीशियम (2, 8, 2) और 38 वाला स्ट्रॉन्शियम—दोनों के बाहरी कोश में भी दो इलेक्ट्रॉन हैं।
परमाणु संख्या 19 वाला पोटैशियम समूह 1 में और 21 वाला स्कैंडियम संक्रमण तत्वों में आता है।
उत्तर: परमाणु संख्या 12 (मैग्नीशियम) और 38 (स्ट्रॉन्शियम) वाले तत्वों के गुणधर्म कैल्सियम के समान हैं, क्योंकि तीनों समूह 2 के तत्व हैं।
A समूह 17 का तत्व है, और समूह 17 के तत्व अधातु होते हैं।
समूह में ऊपर से नीचे जाने पर अधातुओं की अभिक्रियाशीलता घटती है, और C, A से नीचे है।
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर साइज़ घटता है; C समूह 17 में है और B समूह 16 में, यानी B, C के बाईं ओर है।
A अधातु है और उसके बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए वह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाएगा।
उत्तर: (a) A अधातु है। (b) C की अभिक्रियाशीलता A से कम है। (c) C का साइज़ B से छोटा होगा। (d) A ऋणायन बनाएगा।
मेन्डेलीफ की सारणी का आधार परमाणु द्रव्यमान था, जबकि आधुनिक सारणी का आधार परमाणु संख्या है।
मेन्डेलीफ की सारणी में 8 समूह थे, जबकि आधुनिक सारणी में 18 समूह और 7 आवर्त हैं।
मेन्डेलीफ को कुछ जगह परमाणु द्रव्यमान का क्रम तोड़ना पड़ा था, जबकि आधुनिक सारणी में कहीं भी क्रम तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।
समस्थानिकों की समस्या मेन्डेलीफ की सारणी में बनी रही, पर आधुनिक सारणी में वह पूरी तरह हल हो गई।
उत्तर: मुख्य अंतर आधार का है—परमाणु द्रव्यमान बनाम परमाणु संख्या। इसी बदलाव से समूहों की संख्या, क्रम की विसंगतियाँ और समस्थानिकों की स्थिति—तीनों बातें सुलझ गईं।