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आज क्या सीखेंगे
ग्लूकोज़ के विखंडन के तीनों पथ और उनसे मिलने वाली ऊर्जा की तुलना करना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
तेज़ दौड़ने पर पैरों की पेशियों में ऐंठन क्यों होने लगती है? उत्तर श्वसन में छिपा है।
ऑक्सीजन की कमी पड़ते ही शरीर ऊर्जा पाने का दूसरा रास्ता अपनाने लगता है, और उसी से लैक्टिक अम्ल बनता है।
🧠 समझिए (Understand)
श्वसन में ग्लूकोज़ जैसे जटिल कार्बनिक यौगिकों का विखंडन होता है, जिससे मिली ऊर्जा ATP के रूप में संचित रहती है।
पहला चरण तीनों पथों में एक ही है—कोशिकाद्रव्य में छह कार्बन वाला ग्लूकोज़ टूटकर तीन कार्बन वाला पाइरुवेट बनाता है।
इसके बाद रास्ते अलग हो जाते हैं। ऑक्सीजन की उपस्थिति में पाइरुवेट माइटोकॉन्ड्रिया में जाकर कार्बन डाइऑक्साइड और जल में टूट जाता है और बहुत अधिक ऊर्जा मिलती है—यही वायवीय श्वसन है।
ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में यीस्ट में पाइरुवेट एथनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदल जाता है; इसे किण्वन कहते हैं।
हमारी पेशियों में ऑक्सीजन की कमी होने पर पाइरुवेट लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है। इसी लैक्टिक अम्ल के जमा होने से पेशियों में ऐंठन होती है।
वायवीय श्वसन से जीव को अवायवीय की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
सूत्र (Formula)
ग्लूकोज़ → पाइरुवेट → (O₂ के साथ) CO₂ + H₂O + अधिक ऊर्जा
✍️ कैसे करें (How to solve)
पहले लिखिए कि ग्लूकोज़ कोशिकाद्रव्य में पाइरुवेट बनाता है।
फिर देखिए ऑक्सीजन है या नहीं।
उसी के अनुसार तीनों में से सही अंत-उत्पाद और स्थान लिखिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — वायवीय और अवायवीय में अंतर
दोनों में मुख्य अंतर क्या हैं?
वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकॉन्ड्रिया में होता है और इसके अंत-उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल हैं।
अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कोशिकाद्रव्य में होता है और अंत-उत्पाद एथनॉल तथा CO₂, या लैक्टिक अम्ल होते हैं।
वायवीय श्वसन से मिलने वाली ऊर्जा अवायवीय से कहीं अधिक होती है।
अवायवीय श्वसन यीस्ट और कुछ जीवाणुओं में होता है; हमारी पेशियों में भी ऑक्सीजन की कमी पर होता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — पेशियों में ऐंठन
तेज़ दौड़ने पर पैरों में ऐंठन क्यों होती है?
तेज़ दौड़ते समय पेशियों को इतनी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती जितनी उन्हें चाहिए।
ऐसे में पाइरुवेट का विखंडन अवायवीय रास्ते से होता है और लैक्टिक अम्ल बनता है।
यही लैक्टिक अम्ल पेशियों में जमा होकर ऐंठन पैदा करता है।
आराम करने और गहरी साँस लेने पर ऑक्सीजन मिलते ही ऐंठन कम हो जाती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
अवायवीय श्वसन से अधिक ऊर्जा मिलती है। ❌
वायवीय श्वसन में ग्लूकोज़ पूरी तरह टूटता है, इसलिए उससे कहीं अधिक ऊर्जा मिलती है।
वायवीय श्वसन से अधिक ऊर्जा मिलती है।
खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल
पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।