📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)गीली रोटी को दो-तीन दिन ठंडे, अँधेरे स्थान पर रख दीजिए—उस पर धागे जैसी सफेद रचनाएँ उग आती हैं।
इन धागों के सिरों पर छोटे-छोटे काले गोल सिर दिखते हैं। असली जनन इन्हीं से होता है।
🧠 समझिए (Understand)अनेक सरल बहुकोशिक जीवों में विशिष्ट जनन संरचनाएँ पाई जाती हैं।
ब्रेड पर उगने वाला राइजोपस का कवक जाल जनन का भाग नहीं है। जनन में ऊर्ध्व तंतुओं पर बने सूक्ष्म गोल गुच्छ भाग लेते हैं।
ये गुच्छ बीजाणुधानी (Sporangia) हैं, जिनमें विशेष कोशिकाएँ अथवा बीजाणु (Spores) पाए जाते हैं।
ये बीजाणु वृद्धि करके राइजोपस के नए जीव उत्पन्न करते हैं।
बीजाणु के चारों ओर एक मोटी भित्ति होती है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में उसकी रक्षा करती है। नम सतह के संपर्क में आने पर वे वृद्धि करने लगते हैं।
यही मोटी भित्ति बीजाणु का सबसे बड़ा लाभ है—जीव कठिन समय में भी बचा रहता है और अनुकूल परिस्थिति आते ही फैल जाता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — बीजाणु से जनन का लाभबीजाणु द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है?
बीजाणु के चारों ओर मोटी भित्ति होती है, जो उसे सूखे, गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाती है।
वे बहुत हल्के होते हैं, इसलिए हवा के साथ दूर-दूर तक फैल जाते हैं।
नम सतह के संपर्क में आते ही वे वृद्धि करने लगते हैं और नए जीव बना देते हैं।
सुरक्षा, आसान फैलाव और अनुकूल समय की प्रतीक्षा—यही तीन लाभ बीजाणु देते हैं।
उदाहरण 2 (Example 2) — राइजोपस में जननब्रेड पर उगे कवक में जनन किस भाग से होता है?
ब्रेड पर दिखने वाला धागे जैसा कवक जाल जनन में भाग नहीं लेता।
ऊर्ध्व तंतुओं के सिरों पर बने गोल गुच्छ बीजाणुधानी हैं, जिनके भीतर बीजाणु होते हैं।
यही बीजाणु वृद्धि करके राइजोपस के नए जीव बनाते हैं।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)ब्रेड पर दिखने वाला पूरा कवक जाल जनन करता है। ❌
कवक जाल भोजन अवशोषित करता है; जनन केवल ऊर्ध्व तंतुओं पर बनी बीजाणुधानी से होता है।
जनन बीजाणुधानी में बने बीजाणुओं से होता है।