बेकार पदार्थों को उपयोगी वस्तुओं या पदार्थों में बदलने की प्रक्रिया पुनर्चक्रण (Recycling) कहलाती है। इससे कचरे का दोबारा उपयोग हो पाता है।
पुराने कागज को इकट्ठा करके उसकी लुगदी बनाई जाती है। इस लुगदी से नया कागज बनाया जा सकता है।
पुरानी काँच की बोतलों और धातु के कबाड़ को गलाकर नई बोतलें या वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।
सब्जियों के छिलकों और पत्तों जैसे जैविक कचरे से खाद बनाई जा सकती है। यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
इससे कचरे की मात्रा घटती है और नए कच्चे पदार्थों की आवश्यकता कम होती है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है और प्रदूषण भी घटता है।