प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं प्रबंधन का अर्थ है जल, वन, मिट्टी, खनिज और वन्यजीवों का सोच-समझकर उपयोग करना तथा उन्हें नष्ट होने से बचाना।
कई प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनके बनने में बहुत समय लगता है। उनका अंधाधुंध उपयोग भविष्य में कमी और पर्यावरण की समस्याएँ पैदा कर सकता है।
संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार और कम बर्बादी के साथ करना चाहिए। इससे वर्तमान की जरूरतें पूरी होती हैं और संसाधन लंबे समय तक उपलब्ध रहते हैं।
जहाँ संभव हो, वस्तुओं का फिर से उपयोग करना और कचरे से उपयोगी सामग्री बनाना चाहिए। इससे नए संसाधनों की माँग और कचरा दोनों कम होते हैं।
वनों की कटाई रोकना, जल एवं मिट्टी का संरक्षण करना और वन्यजीवों के आवास बचाना संसाधन-प्रबंधन के महत्त्वपूर्ण उपाय हैं।
प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में सरकार, स्थानीय समुदाय और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका है। इनके सहयोग से संसाधनों का उचित प्रबंधन और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षण संभव है।