← पिछले बोर्ड परीक्षा के प्रश्न

उत्तर समझें

खण्ड ब (B) · दीर्घ उत्तरीय · प्रश्न 9
विद्युत मोटर का सिद्धांत सहित वर्णन कीजिए।

सिद्धांत

जब किसी विद्युत-धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल लगता है। इस बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हस्त नियम से ज्ञात की जाती है। विद्युत मोटर इसी सिद्धांत पर काम करती है।

मुख्य भाग

विद्युत मोटर में चुंबक के ध्रुवों के बीच रखी आयताकार कुंडली ABCD, दो कार्बन ब्रश, विभक्त वलय (Split-ring commutator), धुरी और विद्युत स्रोत होते हैं।

कार्यविधि

कुंडली में धारा प्रवाहित करने पर उसकी भुजाओं AB और CD पर विपरीत दिशाओं में बल लगता है। इन बलों के कारण कुंडली और उससे जुड़ी धुरी घूमने लगती है।

आधा चक्कर पूरा होने पर विभक्त वलय कुंडली में धारा की दिशा उलट देता है। इससे दोनों भुजाओं पर लगने वाले बलों की दिशा भी बदल जाती है, पर कुंडली उसी घूर्णन दिशा में घूमती रहती है। प्रत्येक आधे चक्कर के बाद यही क्रिया दोहरती है।

निष्कर्ष

विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। इसका उपयोग पंखे, मिक्सर, पंप और अनेक मशीनों में किया जाता है।