चिपको आंदोलन (Chipko Movement) 1970 के दशक में हिमालयी क्षेत्र, विशेषकर वर्तमान उत्तराखंड में, वनों की व्यावसायिक कटाई के विरोध में चला जन-आंदोलन था।
ग्रामीण लोग, विशेषकर महिलाएँ, पेड़ों से चिपककर खड़ी हो जाती थीं ताकि ठेकेदार उन्हें काट न सकें। गौरा देवी, चंडी प्रसाद भट्ट और सुंदरलाल बहुगुणा जैसे लोगों ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसका उद्देश्य जंगलों को बचाना तथा मिट्टी, जल-स्रोत, ईंधन, चारा और स्थानीय आजीविका की रक्षा करना था।
इस आंदोलन ने बताया कि वन केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं। वे पर्यावरण और स्थानीय जीवन का आधार हैं। शांतिपूर्ण जनभागीदारी ने वन-संरक्षण के प्रति देशभर में जागरूकता बढ़ाई।