अम्लीय व्यवहार H⁺(aq) आयनों के कारण होता है।
अम्ल के अणु से H⁺ का अलग होना केवल जल की उपस्थिति में संभव है; H⁺ जल से जुड़कर H₃O⁺ बनाता है।
उत्तर: जल के बिना अम्ल से H⁺ आयन अलग होते ही नहीं, इसलिए वह अम्लीय व्यवहार नहीं दिखाता—जैसे शुष्क HCl गैस शुष्क लिटमस का रंग नहीं बदलती।
HCl प्रबल अम्ल है और CH₃COOH दुर्बल अम्ल।
समान सांद्रता पर HCl अधिक H⁺ आयन देता है।
अधिक H⁺ का अर्थ है धातु के साथ तेज़ अभिक्रिया और अधिक हाइड्रोजन गैस।
उत्तर: परखनली A में बुदबुदाहट अधिक तेज़ होगी, क्योंकि प्रबल अम्ल होने के कारण HCl अधिक H⁺ आयन देता है।
दूध से दही बनते समय लैक्टिक अम्ल (Lactic acid) बनता है।
अम्ल बनने से विलयन में H⁺ आयन बढ़ जाते हैं।
उत्तर: pH घट जाएगा, यानी 6 से भी कम हो जाएगा, क्योंकि लैक्टिक अम्ल बनने से हाइड्रोजन आयन की सांद्रता बढ़ जाती है।
जल मिलते ही प्लास्टर ऑफ पेरिस जिप्सम बनकर कठोर ठोस में बदल जाता है।
हवा की नमी भी यही अभिक्रिया धीरे-धीरे कर देती है।
उत्तर: नमी से यह CaSO₄·2H₂O बनकर जम जाएगा और उपयोग के लायक नहीं रहेगा, इसलिए इसे नमी-रोधी बर्तन में रखा जाता है।
अम्ल और क्षारक की वह अभिक्रिया जिसमें लवण और जल बनते हैं, उदासीनीकरण कहलाती है।
NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l)
Ca(OH)₂(aq) + 2HCl(aq) → CaCl₂(aq) + 2H₂O(l)
उत्तर: अम्ल + क्षारक → लवण + जल को उदासीनीकरण कहते हैं। उदाहरण: NaOH + HCl → NaCl + H₂O तथा Ca(OH)₂ + 2HCl → CaCl₂ + 2H₂O।
यह काँच, साबुन और कागज़ उद्योग में काम आता है तथा जल की स्थायी कठोरता दूर करता है।
यह बेकिंग पाउडर बनाने में काम आता है और ऐन्टैसिड के रूप में पेट के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करता है।
उत्तर: धोने का सोडा: (i) काँच, साबुन और कागज़ उद्योग में, (ii) जल की स्थायी कठोरता दूर करने में। खाने का सोडा: (i) बेकिंग पाउडर बनाने में, (ii) ऐन्टैसिड के रूप में।
pH 7 उदासीन; 7 से जितना कम उतना अधिक अम्लीय; 7 से जितना अधिक उतना अधिक क्षारीय।
(a) उदासीन → D (pH 7)
(b) प्रबल क्षारीय → C (pH 11)
(c) प्रबल अम्लीय → B (pH 1)
(d) दुर्बल अम्लीय → A (pH 4)
(e) दुर्बल क्षारीय → E (pH 9)
H⁺ की सांद्रता pH घटने पर बढ़ती है, इसलिए बढ़ते H⁺ का अर्थ है घटता pH: 11, 9, 7, 4, 1।
उत्तर: (a) D, (b) C, (c) B, (d) A, (e) E। हाइड्रोजन आयन सांद्रता के बढ़ते क्रम में: C < E < D < A < B।
खाने का सोडा हल्का क्षारक है। थोड़ा क्षारीय दूध जल्दी खट्टा नहीं होता, क्योंकि बनने वाले अम्ल को पहले इसी क्षार को उदासीन करना पड़ता है।
दही तभी जमता है जब पर्याप्त लैक्टिक अम्ल बनकर दूध पर्याप्त अम्लीय हो जाए।
क्षारीय दूध में बनने वाला अम्ल पहले क्षार से उदासीन होता है, इसलिए आवश्यक अम्लीयता देर से आती है।
उत्तर: (a) ताकि दूध देर तक ताज़ा रहे और जल्दी खट्टा न हो। (b) क्योंकि बनने वाला लैक्टिक अम्ल पहले मिलाए गए क्षार को उदासीन करने में लगता है, इसलिए दही जमने के लिए आवश्यक अम्लीयता देर से बनती है।