📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)सूचक इतना ही बताते हैं कि पदार्थ अम्लीय है या क्षारीय। पर यह कैसे जानें कि कौन सा अम्ल कितना प्रबल है?
इसके लिए सार्वत्रिक सूचक (Universal indicator) काम आता है, जो कई सूचकों का मिश्रण है और H⁺ की अलग-अलग सांद्रता पर अलग रंग दिखाता है।
🧠 समझिए (Understand)pH वह संख्या है जो विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता बताती है। pH का 'p' जर्मन शब्द potenz से है, जिसका अर्थ है शक्ति।
पैमाना सामान्यतः 0 से 14 तक होता है। pH 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारीय होता है।
हाइड्रोनियम आयन की सांद्रता जितनी अधिक होगी, pH का मान उतना ही कम होगा।
7 से 14 की ओर बढ़ने का अर्थ है OH⁻ की सांद्रता बढ़ना, यानी क्षार की प्रबलता बढ़ना।
जो अम्ल अधिक H⁺ देते हैं वे प्रबल अम्ल (Strong acids) और जो कम देते हैं वे दुर्बल अम्ल (Weak acids) कहलाते हैं। यही बात क्षारकों पर OH⁻ के साथ लागू होती है।
उदाहरण 1 (Example 1) — दो विलयनों की तुलनाविलयन A का pH 6 है और विलयन B का pH 8।
A का pH 7 से कम है, इसलिए A अम्लीय है। B का pH 7 से अधिक है, इसलिए B क्षारीय है।
pH जितना कम, H⁺ उतना अधिक। इसलिए A में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है।
A अम्लीय और उसमें H⁺ अधिक; B क्षारीय।
उदाहरण 2 (Example 2) — HCl और ऐसीटिक अम्ल में अंतरसमान लंबाई के मैग्नीशियम रिबन पर समान सांद्रता के HCl और CH₃COOH डाले गए।
HCl प्रबल अम्ल है और अधिक H⁺ देता है; ऐसीटिक अम्ल दुर्बल है और कम H⁺ देता है।
अधिक H⁺ का अर्थ है तेज़ अभिक्रिया, इसलिए HCl वाली परखनली में बुदबुदाहट अधिक तेज़ होगी।
HCl वाली परखनली A में फ़िज़िंग अधिक तेज़ होती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)pH जितना अधिक, अम्ल उतना प्रबल। ❌
उल्टा है। H⁺ बढ़ने पर pH घटता है, इसलिए प्रबल अम्ल का pH कम होता है।
pH कम → H⁺ अधिक → अम्ल अधिक प्रबल।