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अभ्यास — अध्याय 3 की प्रश्नावली (भाग 2) (Chapter Exercise (Part 2))

4 लघु · 4 दीर्घ

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer — 2 अंक प्रत्येक)

  1. लोहे पर जंग लगने से रोकने के दो उपाय बताइए।
    उत्तर देखें (See answer)

    जंग लगने के लिए हवा और जल दोनों चाहिए, इसलिए इनमें से किसी एक का संपर्क रोकना काफी है।

    सतह ढकने वाले उपाय: पेंट, तेल या ग्रीस लगाना, जस्ते की परत चढ़ाना। गुण बदलने वाला उपाय: मिश्रातु बनाना।

    उत्तर: (i) पेंट, तेल या ग्रीस लगाकर सतह को हवा और नमी से अलग करना। (ii) गैल्वनीकरण, यानी जस्ते की पतली परत चढ़ाना—जिसकी खूबी यह है कि परत टूटने पर भी लोहा सुरक्षित रहता है, क्योंकि जस्ता अधिक क्रियाशील होकर पहले स्वयं अभिक्रिया करता है।

  2. अधातुओं के ऑक्सीजन से मिलने पर किस प्रकार के ऑक्साइड बनते हैं?
    उत्तर देखें (See answer)

    अधातु ऑक्सीजन से मिलकर अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाते हैं।

    SO₂ और CO₂ अम्लीय ऑक्साइड हैं; जल और कार्बन मोनोऑक्साइड उदासीन ऑक्साइड हैं।

    उत्तर: अधातु अम्लीय अथवा उदासीन ऑक्साइड बनाते हैं। अम्लीय ऑक्साइड जल में घुलकर अम्ल देते हैं और नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।

  3. कलईदार (tarnished) ताँबे के बर्तन नींबू या इमली के रस से साफ किए जाते हैं। ये खट्टे पदार्थ सफाई में प्रभावी क्यों हैं?
    उत्तर देखें (See answer)

    ताँबे पर चढ़ी हरी परत कॉपर कार्बोनेट की होती है, जो नम CO₂ से बनती है।

    नींबू में सिट्रिक अम्ल और इमली में टार्टरिक अम्ल होता है।

    यह अम्ल क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट को घोलकर हटा देता है और नीचे की चमकदार सतह दिखने लगती है।

    उत्तर: क्योंकि इनमें उपस्थित अम्ल ताँबे पर जमी क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट की परत को उदासीन करके घोल देता है, जिससे बर्तन फिर चमकने लगता है।

  4. गर्म जल की टंकियाँ ताँबे की बनाई जाती हैं, स्टील (लोहे का मिश्रातु) की नहीं। कारण बताइए।
    उत्तर देखें (See answer)

    लोहा भाप से अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड और हाइड्रोजन बनाता है।

    ताँबा न ठंडे जल से, न गर्म जल से और न भाप से अभिक्रिया करता है।

    उत्तर: क्योंकि ताँबा जल और भाप किसी से अभिक्रिया नहीं करता, जबकि स्टील का लोहा भाप से अभिक्रिया कर लेता है। साथ ही ताँबा ऊष्मा का सुचालक भी है, इसलिए गर्म जल की टंकियाँ ताँबे की बनाई जाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer — 5 अंक प्रत्येक)

  1. प्रत्यूष ने स्पैचुला पर गंधक चूर्ण लेकर उसे गर्म किया और निकली गैस को परखनली से एकत्र किया। (a) इस गैस की क्या क्रिया होगी— (i) शुष्क लिटमस पत्र पर, (ii) नम लिटमस पत्र पर? (b) होने वाली अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए।
    उत्तर देखें (See answer)

    गंधक जलकर सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) देती है, जो अधातु का ऑक्साइड है।

    शुष्क लिटमस का रंग नहीं बदलेगा, क्योंकि जल के बिना अम्ल बनता ही नहीं।

    नम लिटमस पर मौजूद जल से SO₂ मिलकर सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है, इसलिए नीला लिटमस लाल हो जाएगा।

    उत्तर: (a) (i) शुष्क लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं; (ii) नम नीला लिटमस लाल हो जाएगा। (b) S(s) + O₂(g) → SO₂(g); तथा SO₂ + H₂O → H₂SO₃। यह सिद्ध करता है कि अधातु का ऑक्साइड अम्लीय होता है।

  2. कारण दीजिए— (a) प्लैटिनम, सोना और चाँदी आभूषण बनाने में काम आते हैं। (b) सोडियम, पोटैशियम और लीथियम तेल में डुबोकर रखे जाते हैं। (c) ऐलुमिनियम अत्यधिक क्रियाशील होते हुए भी खाना पकाने के बर्तन बनाने में काम आता है। (d) निष्कर्षण के दौरान कार्बोनेट और सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड में बदला जाता है।
    उत्तर देखें (See answer)

    ये तीनों कम क्रियाशील हैं, इसलिए हवा और नमी से संक्षारित नहीं होतीं और चमक बनी रहती है। साथ ही ये आघातवर्ध्य और तन्य हैं, इसलिए मनचाहा आकार दिया जा सकता है।

    ये अत्यधिक क्रियाशील हैं और हवा तथा नमी से इतनी तेज़ी से अभिक्रिया करती हैं कि आग लग सकती है। तेल इन्हें हवा से अलग रखता है।

    हवा के संपर्क में आते ही ऐलुमिनियम पर ऑक्साइड की पतली परत बन जाती है, जो उसे आगे के ऑक्सीकरण और संक्षारण से बचा लेती है। साथ ही वह ऊष्मा का सुचालक है और उसका गलनांक ऊँचा है।

    सल्फाइड और कार्बोनेट की तुलना में ऑक्साइड को अपचयित करके धातु प्राप्त करना कहीं आसान है।

    उत्तर: (a) कम क्रियाशील होने से संक्षारित नहीं होतीं और आघातवर्ध्य तथा तन्य भी हैं। (b) अत्यधिक क्रियाशील होने से हवा और नमी से आग पकड़ सकती हैं। (c) ऑक्साइड की सुरक्षात्मक परत और ऊष्मा की सुचालकता के कारण। (d) क्योंकि ऑक्साइड का अपचयन सरल है।

  3. रासायनिक गुणों के आधार पर धातु और अधातु में अंतर लिखिए।
    उत्तर देखें (See answer)

    धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं; अधातुएँ इलेक्ट्रॉन लेकर ऋणायन बनाती हैं।

    धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं (कुछ उभयधर्मी); अधातु ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन होते हैं।

    धातुएँ तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित कर देती हैं; अधातुएँ नहीं करतीं।

    अधातुएँ हाइड्रोजन से मिलकर हाइड्राइड बनाती हैं।

    उत्तर: धातु: इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती है, क्षारकीय ऑक्साइड देती है, तनु अम्ल से H₂ विस्थापित करती है। अधातु: इलेक्ट्रॉन लेकर ऋणायन बनाती है, अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड देती है, तनु अम्ल से H₂ विस्थापित नहीं करती और हाइड्रोजन से हाइड्राइड बनाती है।

  4. एक व्यक्ति स्वयं को सुनार बताकर घर-घर गया और पुराने गहनों की चमक लौटाने का वादा किया। एक महिला ने उसे सोने के कंगन दिए, जिन्हें उसने किसी विलयन में डुबो दिया। कंगन नए जैसे चमकने लगे पर उनका वज़न बहुत घट गया। बताइए उसने कौन-सा विलयन काम में लिया होगा?
    उत्तर देखें (See answer)

    सोना बहुत कम क्रियाशील है और साधारण अम्ल उसे नहीं घोलते—फिर भी वज़न घटा, यानी कुछ सोना घुल गया।

    सोने को केवल अम्लराज (Aqua regia) घोल सकता है।

    यह सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 अनुपात में ताज़ा बना मिश्रण है।

    उत्तर: उसने अम्लराज (Aqua regia) का प्रयोग किया होगा—सांद्र HCl और सांद्र HNO₃ का 3:1 मिश्रण। इसने कंगनों की ऊपरी परत का सोना घोल लिया, जिससे वे चमक तो उठे पर उनका वज़न घट गया।

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