← अध्ययनकायिक प्रवर्धन और ऊतक संवर्धन
आज क्या सीखेंगेकायिक प्रवर्धन के लाभ बताना और ऊतक संवर्धन की प्रक्रिया समझाना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)गन्ना, आलू, गुलाब और केला—इनमें से कोई भी बीज से नहीं उगाया जाता।
इनके तने या जड़ के टुकड़े से ही नया पौधा मिल जाता है, और वह जनक जैसा ही होता है।
🧠 समझिए (Understand)कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation) में पौधे की जड़, तना अथवा पत्ती से नए पौधे विकसित होते हैं।
ब्रायोफिलम की पत्ती के किनारों पर कलिकाएँ निकल आती हैं, जो मिट्टी में गिरकर नए पौधे बना देती हैं।
जो पौधे बीज नहीं बनाते या जिनके बीज जीवनक्षम नहीं होते, उन्हें उगाने के लिए यही विधि काम आती है—जैसे केला, संतरा, गुलाब और चमेली।
इस विधि से तैयार पौधे जनक के समान होते हैं, इसलिए फल और फूल की गुणवत्ता वही बनी रहती है।
दूसरा लाभ यह है कि बीज से उगाने की तुलना में ये पौधे कम समय में फल देने लगते हैं।
ऊतक संवर्धन (Tissue culture) में पौधे के शीर्ष के वर्धमान भाग से ऊतक या कोशिकाएँ अलग करके कृत्रिम पोषक माध्यम में रखी जाती हैं। वे विभाजित होकर कोशिकाओं का छोटा समूह बनाती हैं, जिसे कैलस कहते हैं।
कैलस को वृद्धि एवं विभेदन के हॉर्मोन युक्त दूसरे माध्यम में स्थानांतरित किया जाता है और फिर पौधे को मिट्टी में रोप दिया जाता है। इस तकनीक से एक ही पौधे से अनेक पौधे संक्रमण-मुक्त परिस्थितियों में तैयार किए जा सकते हैं।
✍️ कैसे करें (How to solve)- पहले बताइए पौधे का कौन सा भाग काम में आया—जड़, तना या पत्ती।
- फिर लाभ लिखिए—जनक जैसा होना और जल्दी फल देना।
- ऊतक संवर्धन का प्रश्न हो तो कैलस वाला चरण जरूर लिखिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — कायिक प्रवर्धन क्यों काम में लाया जाता हैकुछ पौधों को उगाने के लिए यही विधि क्यों चुनी जाती है?
केला, संतरा, गुलाब और चमेली जैसे पौधे या तो बीज नहीं बनाते या उनके बीज जीवनक्षम नहीं होते।
इस विधि से बने पौधे जनक के समान होते हैं, इसलिए फल और फूल की गुणवत्ता वही बनी रहती है।
ये पौधे बीज से उगाए गए पौधों की तुलना में कम समय में फल देने लगते हैं।
इन्हीं तीन कारणों से बागवानी में कायिक प्रवर्धन का व्यापक उपयोग होता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — ऊतक संवर्धन के चरणएक पौधे से हजारों पौधे कैसे बनाए जाते हैं?
पौधे के शीर्ष के वर्धमान भाग से ऊतक या कोशिकाएँ अलग करके कृत्रिम पोषक माध्यम में रखी जाती हैं।
वहाँ वे विभाजित होकर कोशिकाओं का छोटा समूह बनाती हैं, जिसे कैलस कहते हैं।
कैलस को वृद्धि और विभेदन के हॉर्मोन युक्त दूसरे माध्यम में रखा जाता है, जिससे वह छोटे पौधों में विकसित हो जाता है।
ये पौधे मिट्टी में रोप दिए जाते हैं; इस तरह संक्रमण-मुक्त परिस्थितियों में अनेक पौधे तैयार होते हैं।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)कायिक प्रवर्धन से बने पौधों में विभिन्नता अधिक होती है। ❌
यह अलैंगिक जनन है, इसलिए संतति जनक के समान होती है और विभिन्नता बहुत कम रहती है।
कायिक प्रवर्धन से बने पौधे जनक के समान होते हैं।
खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल
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