← अध्ययनप्राकृतिक चयन और आनुवंशिक विचलन
आज क्या सीखेंगेभृंगों के उदाहरण से प्राकृतिक चयन और आनुवंशिक विचलन में अंतर करना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)हरी झाड़ियों में रहने वाले लाल भृंगों को कौए आसानी से देख लेते हैं और खा जाते हैं।
एक दिन किसी भृंग में हरा रंग आ जाता है। अब वह झाड़ी में छिप जाता है—और यहीं से कहानी बदल जाती है।
🧠 समझिए (Understand)लाल भृंगों की समष्टि में यदि किसी भृंग में हरे रंग की विभिन्नता आ जाए, तो वह हरी झाड़ियों में छिप जाता है और कौए उसे कम देख पाते हैं।
ऐसे भृंग अधिक जीवित रहते हैं और अधिक संतति छोड़ते हैं, इसलिए कुछ पीढ़ियों बाद समष्टि में हरे भृंगों की संख्या बढ़ जाती है—यही प्राकृतिक चयन (Natural selection) है।
प्राकृतिक चयन पर्यावरण द्वारा होता है; जो विभिन्नता उस पर्यावरण में उत्तरजीविता का लाभ देती है, वही फैलती है।
अब मान लीजिए किसी भृंग में नीले रंग की विभिन्नता आ जाती है, जो कोई लाभ नहीं देती। फिर भी यदि संयोगवश लाल भृंगों की संख्या किसी दुर्घटना में, जैसे हाथी के पैर तले आकर, बहुत घट जाए तो बची हुई समष्टि में नीले भृंगों का अनुपात बढ़ जाएगा।
ऐसा परिवर्तन जो किसी लाभ के कारण नहीं, बल्कि आकस्मिक रूप से होता है, आनुवंशिक विचलन (Genetic drift) कहलाता है।
तीसरी स्थिति यह है कि झाड़ियों में कोई रोग लग जाए और भोजन घट जाए। तब भृंग दुबले हो जाएँगे, पर उनके डी.एन.ए. में कोई परिवर्तन नहीं होगा, इसलिए यह परिवर्तन अगली पीढ़ी में नहीं जाएगा।
इसलिए किसी लक्षण वाले जीवों की संख्या समष्टि में तीन तरह से बढ़ सकती है—प्राकृतिक चयन से, आनुवंशिक विचलन से, अथवा प्रवास द्वारा आए जीन से।
सूत्र (Formula)प्राकृतिक चयन — लाभ के कारण; आनुवंशिक विचलन — संयोग के कारण
✍️ कैसे करें (How to solve)- पहले पूछिए कि उस लक्षण से जीव को कोई लाभ मिला या नहीं।
- लाभ मिला हो तो प्राकृतिक चयन लिखिए।
- संयोग से संख्या बदली हो तो आनुवंशिक विचलन लिखिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — संख्या बढ़ने के तरीकेवे कौन से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है?
यदि वह लक्षण उस पर्यावरण में उत्तरजीविता का लाभ देता है तो प्राकृतिक चयन द्वारा उसकी संख्या बढ़ती है, जैसे हरी झाड़ियों में हरे भृंग।
कभी-कभी बिना किसी लाभ के भी, केवल आकस्मिक घटनाओं के कारण किसी लक्षण का अनुपात बढ़ जाता है—इसे आनुवंशिक विचलन कहते हैं।
तीसरा तरीका प्रवास है; दूसरी समष्टि से आए जीव अपने जीन नई समष्टि में ले आते हैं।
प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन और प्रवास—इन तीन तरीकों से किसी लक्षण की संख्या बढ़ सकती है।
उदाहरण 2 (Example 2) — बाघों की घटती संख्याबाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय क्यों है?
समष्टि छोटी हो जाने पर उसमें बचे हुए जीन भी सीमित रह जाते हैं और विभिन्नता बहुत घट जाती है।
कम विभिन्नता वाली समष्टि में कोई नया रोग अथवा पर्यावरण का परिवर्तन सभी सदस्यों को एक साथ प्रभावित कर सकता है।
निकट संबंधियों के बीच जनन होने से अप्रभावी हानिकारक लक्षण भी प्रकट होने लगते हैं।
इसीलिए बाघों की घटती संख्या केवल गिनती की नहीं, स्पीशीज़ के बचे रहने की समस्या है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)समष्टि में किसी लक्षण का बढ़ना सदा उसके लाभदायक होने का प्रमाण है। ❌
आनुवंशिक विचलन में बिना किसी लाभ के भी, केवल संयोग से किसी लक्षण का अनुपात बढ़ जाता है।
बढ़ोतरी चयन से भी हो सकती है और संयोग से भी।
खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल
पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।
अगला विषय (Next topic): उपार्जित एवं आनुवंशिक लक्षण →← पिछला विषय (Previous topic): प्रश्नावली 9.2