यदि वह लक्षण उस पर्यावरण में उत्तरजीविता का लाभ देता है तो प्राकृतिक चयन द्वारा उसकी संख्या बढ़ती है, जैसे हरी झाड़ियों में हरे भृंग।
आनुवंशिक विचलन में बिना किसी लाभ के भी, केवल आकस्मिक घटनाओं के कारण किसी लक्षण का अनुपात बढ़ जाता है।
प्रवास से दूसरी समष्टि के जीव आकर अपने जीन नई समष्टि में ले आते हैं।
उत्तर: प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन तथा प्रवास—इन तीन तरीकों से किसी लक्षण वाले जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है।
उपार्जित लक्षण शरीर के कायिक ऊतकों में आते हैं, जैसे व्यायाम से बढ़ी हुई पेशियाँ या कटी हुई पूँछ।
अगली पीढ़ी को केवल जनन कोशिकाओं का डी.एन.ए. मिलता है, और कायिक ऊतकों में हुए परिवर्तन से वह डी.एन.ए. नहीं बदलता।
चूहों की पूँछ कई पीढ़ियों तक काटने पर भी बिना पूँछ वाले चूहे पैदा नहीं हुए।
उत्तर: चूँकि उपार्जित लक्षण जनन कोशिकाओं के डी.एन.ए. को नहीं बदलते, इसलिए वे अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते।
समष्टि छोटी होने पर उसमें बचे हुए जीन भी सीमित रह जाते हैं और विभिन्नता बहुत घट जाती है।
कम विभिन्नता वाली समष्टि में कोई नया रोग अथवा पर्यावरण का परिवर्तन सभी सदस्यों को एक साथ प्रभावित कर सकता है।
निकट संबंधियों के बीच जनन होने से अप्रभावी हानिकारक लक्षण भी प्रकट होने लगते हैं।
उत्तर: विभिन्नता घट जाने से बाघों की उत्तरजीविता और भविष्य दोनों संकट में पड़ जाते हैं, इसीलिए यह आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय है।