जीवाश्म उन स्पीशीज़ के अवशेष हैं जो अब जीवित नहीं हैं, इसलिए वे अतीत के जीवन का सीधा प्रमाण देते हैं।
उनकी गहराई तथा रेडियोऐक्टिव विधि से आयु जानकर यह तय किया जा सकता है कि कौन-सी स्पीशीज़ पहले थी और कौन बाद में आई।
कुछ जीवाश्म दो समूहों के बीच की कड़ी दिखाते हैं, जैसे परों वाले डाइनोसॉर, जिनसे पक्षियों और सरीसृपों का संबंध स्पष्ट होता है।
उत्तर: जीवाश्म विकास का क्रम और स्पीशीज़ के बीच की कड़ियाँ दोनों दिखाते हैं, इसलिए विकासीय संबंध स्थापित करने में उनका महत्त्व बहुत बड़ा है।
1953 में स्टेनले एल० मिलर तथा हेराल्ड सी० यूरे ने एक बंद पात्र में आरंभिक पृथ्वी जैसा वातावरण बनाया, जिसमें मेथैन, अमोनिया, हाइड्रोजन और जलवाष्प थे पर ऑक्सीजन नहीं थी।
इस मिश्रण को लगभग सौ डिग्री सेल्सियस से कुछ नीचे रखकर उसमें विद्युत चिंगारियाँ उत्पन्न की गईं, जो बिजली कड़कने जैसी स्थिति थी।
एक सप्ताह बाद उस पात्र में अमीनो अम्ल बने हुए मिले, जो जीवों की प्रोटीन की इकाइयाँ हैं।
उत्तर: इसी प्रयोग के आधार पर कहा जाता है कि उपयुक्त परिस्थितियों में अजैविक पदार्थों से जैव अणु बन सकते हैं, यानी जीवन की उत्पत्ति अजैविक पदार्थों से हुई।
युग्मक बनते समय जनक की कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या आधी कर दी जाती है, इसलिए हर युग्मक में हर लक्षण का केवल एक विकल्प जाता है।
निषेचन के समय नर और मादा युग्मक मिलते हैं, जिससे संतति में हर लक्षण के दो विकल्प हो जाते हैं—एक पिता से और एक माता से।
इस प्रकार संतति को गुणसूत्रों का आधा समूह माता से और आधा पिता से मिलता है।
उत्तर: युग्मक बनते समय गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाना ही वह व्यवस्था है जिससे दोनों जनकों का आनुवंशिक योगदान बराबर रहता है।
यह कथन पूरी तरह सही नहीं है, यद्यपि इसमें आंशिक सच्चाई है।
जो विभिन्नता व्यष्टि को उत्तरजीविता का लाभ देती है वह प्राकृतिक चयन द्वारा समष्टि में फैलती जरूर है।
पर आनुवंशिक विचलन में बिना किसी लाभ के भी, केवल आकस्मिक घटनाओं के कारण कोई विभिन्नता समष्टि में बनी रह जाती है।
उत्तर: इसलिए मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत नहीं हूँ—उपयोगी विभिन्नताएँ ही नहीं, निरपेक्ष विभिन्नताएँ भी संयोगवश समष्टि में बनी रह सकती हैं।
अपने आसपास के कम से कम बीस-पच्चीस कुत्तों की खाल के रंग की सूची बनाइए और हर एक का रंग लिखिए।
जहाँ संभव हो, पिल्लों के साथ उनके माता-पिता के रंग भी दर्ज कीजिए, क्योंकि असली उत्तर इसी जोड़ी से निकलेगा।
अब वे जोड़े छाँटिए जिनमें माता-पिता दोनों का रंग एक जैसा है पर पिल्ले का रंग अलग निकला—वह अलग रंग ही अप्रभावी लक्षण होगा।
जो रंग दो भिन्न रंगों वाले जनकों की संतति में बार-बार दिखाई दे, वह प्रभावी लक्षण माना जाएगा।
उत्तर: आँकड़े को तालिका में लिखकर गिनिए कि कौन-सा रंग किस जोड़ी से किस अनुपात में आया; जितने अधिक जोड़े देखेंगे, निष्कर्ष उतना ही विश्वसनीय होगा।
अलैंगिक जनन में विभिन्नता केवल डी.एन.ए. की प्रतिकृति में हुई छोटी त्रुटियों से आती है, इसलिए वह कम भी होती है और अगली प्रतिकृति में सुधर भी सकती है।
लैंगिक जनन में दो जनकों का डी.एन.ए. मिलता है और युग्मक बनते समय नए संयोग बनते हैं, इसलिए विभिन्नताएँ अधिक मात्रा में और स्थायी रूप से समष्टि में आ जाती हैं।
इन विभिन्नताओं पर प्राकृतिक चयन काम करता है—जो गुण उस पर्यावरण में लाभदायक है वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी फैलता जाता है।
उत्तर: इसी कारण लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों में विकास की गति तेज होती है और वे बदलते पर्यावरण के साथ अधिक सरलता से बने रह पाते हैं।