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वंशागत लक्षण और मेंडल का एकसंकर प्रयोग

आज क्या सीखेंगे

प्रभावी तथा अप्रभावी लक्षण पहचानना और 3 : 1 अनुपात का कारण समझाना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
मेंडल ने मटर के लंबे पौधे का संकरण बौने पौधे से कराया। पहली पीढ़ी में सारे पौधे लंबे निकले—बौनापन मानो गायब हो गया।
पर अगली पीढ़ी में बौने पौधे फिर लौट आए, वह भी एक निश्चित अनुपात में। यहीं से वंशागति के नियम निकले।
🧠 समझिए (Understand)
माता और पिता दोनों ही समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ संतति में स्थानांतरित करते हैं, इसलिए हर लक्षण के लिए हर संतति में दो विकल्प होते हैं।
मेंडल ने लंबे और बौने मटर के पौधों का संकरण कराया। पहली संतति पीढ़ी F₁ के सारे पौधे लंबे थे, यानी बौनेपन का लक्षण दिखाई नहीं दिया।
F₁ पौधों के स्वनिषेचन से मिली F₂ पीढ़ी में लंबे और बौने पौधे 3 : 1 के अनुपात में मिले, यानी बौनापन समाप्त नहीं हुआ था, केवल छिपा हुआ था।
इसकी व्याख्या यह है कि लंबाई के लिए T और बौनेपन के लिए t—दो विकल्प होते हैं। TT और Tt दोनों ही लंबे पौधे हैं, जबकि केवल tt बौना होता है।
T की एक ही प्रति पौधे को लंबा बनाने के लिए पर्याप्त है, जबकि बौनेपन के लिए t की दोनों प्रतियाँ चाहिए।
T जैसे लक्षण प्रभावी (Dominant) और t जैसे लक्षण अप्रभावी (Recessive) कहलाते हैं।
मेंडल के प्रयोगों से ही पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं, क्योंकि F₁ में एक लक्षण पूरी तरह छिप गया और F₂ में फिर प्रकट हो गया।
F₂ पीढ़ी: Tt × TtTtTtTTलंबाTtलंबाTtलंबाttबौनालंबे = 3बौने = 1T की एक प्रति ही पौधे को लंबा बना देती है, इसलिए अनुपात 3 : 1 मिलता है।
F₂ में तीन लंबे और एक बौना—यही 3 : 1 अनुपात है।
सूत्र (Formula)
F₂ — लंबे : बौने = 3 : 1; जीनप्ररूप TT : Tt : tt = 1 : 2 : 1
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले दोनों जनकों के जीनप्ररूप लिखिए।
  2. फिर उनके युग्मक निकालिए और वर्ग बनाकर सभी संयोग लिखिए।
  3. अंत में प्रभावी-अप्रभावी के नियम से दृश्य लक्षण गिनिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — प्रभावी और अप्रभावी कैसे पता चला
मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?
लंबे और बौने पौधों के संकरण से बनी F₁ पीढ़ी के सारे पौधे लंबे थे—बौनापन कहीं दिखाई नहीं दिया।
यदि दोनों लक्षण बराबर होते तो F₁ में मध्यम ऊँचाई के पौधे मिलते, पर ऐसा नहीं हुआ।
F₂ पीढ़ी में बौने पौधे फिर प्रकट हो गए, यानी वह लक्षण नष्ट नहीं हुआ था, केवल दबा हुआ था।
इसी से सिद्ध हुआ कि लंबाई प्रभावी लक्षण है और बौनापन अप्रभावी।
उदाहरण 2 (Example 2) — रुधिर वर्ग का प्रश्न
'A' रुधिर वर्ग वाला पुरुष 'O' रुधिर वर्ग वाली स्त्री से विवाह करता है और उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग 'O' है। क्या इससे पता चलता है कि कौन-सा लक्षण प्रभावी है?
पुत्री का रुधिर वर्ग O है, इसलिए उसे माता और पिता दोनों से O वाला विकल्प मिला होगा।
इसका अर्थ है कि पिता का जीनप्ररूप AO रहा होगा, यानी उसमें A और O दोनों विकल्प थे पर दिखा केवल A।
यह एक पीढ़ी की जानकारी है; यह नहीं बताती कि माता-पिता की संतानों में कौन-सा वर्ग अधिक मिलता है।
यह सूचना अकेली पर्याप्त नहीं है, पर इतना संकेत जरूर देती है कि A प्रभावी और O अप्रभावी लक्षण है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
F₁ में अप्रभावी लक्षण नष्ट हो जाता है। ❌
वह केवल व्यक्त नहीं होता; F₂ में 1/4 पौधों में वह फिर से दिखाई देता है।
अप्रभावी लक्षण छिपा रहता है, नष्ट नहीं होता।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

एकसंकर क्रॉस की F₂ पीढ़ी में दृश्य लक्षणों का अनुपात क्या होता है?

सवाल 2

Tt जीनप्ररूप वाला पौधा कैसा दिखेगा?

सवाल 3

मेंडल ने अपने प्रयोग किस पौधे पर किए?
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