जल वायु की तुलना में प्रकाशिक रूप से सघन माध्यम है, क्योंकि उसमें प्रकाश की चाल कम होती है।
विरल माध्यम से सघन माध्यम में तिरछी जाने वाली किरण सदा अभिलंब की ओर झुक जाती है।
उत्तर: किरण अभिलंब की ओर झुकेगी, क्योंकि जल में प्रवेश करते ही प्रकाश की चाल घट जाती है।
अपवर्तनांक की परिभाषा है n = c/v, जहाँ c निर्वात में और v माध्यम में प्रकाश की चाल है।
इसे पलटने पर v = c/n मिलता है।
मान रखने पर v = (3 × 10⁸)/1.50 = 2 × 10⁸ m/s।
उत्तर: काँच में प्रकाश की चाल 2 × 10⁸ m/s है।
प्रकाशिक घनत्व अपवर्तनांक से तय होता है—अपवर्तनांक जितना अधिक, माध्यम उतना ही अधिक प्रकाशिक रूप से सघन।
सारणी में सबसे अधिक अपवर्तनांक हीरे का है, 2.42।
सबसे कम अपवर्तनांक वायु का है, लगभग 1.0003।
उत्तर: अधिकतम प्रकाशिक घनत्व हीरे का और न्यूनतम वायु का है।
सारणी के अनुसार अपवर्तनांक इस प्रकार हैं—जल 1.33, किरोसिन 1.44 और तारपीन का तेल 1.47।
n = c/v के अनुसार जिसका अपवर्तनांक सबसे कम होगा, उसमें प्रकाश की चाल सबसे अधिक होगी।
तीनों में सबसे कम अपवर्तनांक जल का है।
उत्तर: प्रकाश जल में सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है।
अपवर्तनांक प्रकाश की निर्वात में चाल तथा उसी माध्यम में चाल का अनुपात है।
2.42 का अर्थ है कि हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात की तुलना में 2.42 गुना कम हो जाती है।
उत्तर: यह सभी ज्ञात पदार्थों में सबसे अधिक अपवर्तनांक है, इसीलिए हीरे में प्रकाश सबसे अधिक मुड़ता है और हीरा चमकदार दिखाई देता है।