📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)घड़ीसाज़ छोटे पुर्जे देखने के लिए आवर्धक लेंस लगाता है, और चश्मे में भी लेंस ही होता है।
दोनों में अंतर सिर्फ इतना है कि एक किरणों को पास लाता है और दूसरा फैलाता है।
🧠 समझिए (Understand)दो पृष्ठों से घिरा कोई पारदर्शी माध्यम जिसका एक या दोनों पृष्ठ गोलीय हों, लेंस (Lens) कहलाता है।
बाहर की ओर उभरे दो गोलीय पृष्ठों वाला लेंस द्वि-उत्तल अथवा उत्तल लेंस कहलाता है; यह किनारों की अपेक्षा बीच से मोटा होता है।
उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को अभिसरित करता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस (Converging lens) भी कहते हैं।
अंदर की ओर वक्रित दो गोलीय पृष्ठों वाला लेंस अवतल लेंस कहलाता है; यह बीच की अपेक्षा किनारों से मोटा होता है और किरणों को अपसरित करता है, इसलिए अपसारी लेंस (Diverging lens) कहलाता है।
लेंस के दोनों ओर वक्रता केंद्र होते हैं, और लेंस के मध्य बिंदु को प्रकाशिक केंद्र (Optical centre, O) कहते हैं।
मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें उत्तल लेंस से अपवर्तन के बाद मुख्य फोकस पर मिलती हैं; अवतल लेंस में वे फोकस से आती हुई प्रतीत होती हैं।
किरण आरेख के लिए दो किरणें काफी हैं—मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरण अपवर्तन के बाद फोकस से होकर जाती है, और प्रकाशिक केंद्र से गुजरने वाली किरण बिना मुड़े सीधी निकल जाती है।
उत्तल लेंस का प्रतिबिंब बिंब की स्थिति पर निर्भर करता है; जब बिंब 2F₁ पर हो तो प्रतिबिंब दूसरी ओर 2F₂ पर बराबर आकार का और वास्तविक बनता है, और जब बिंब फोकस तथा प्रकाशिक केंद्र के बीच हो तो प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है।
अवतल लेंस का प्रतिबिंब सदा आभासी, सीधा और बिंब से छोटा होता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — बराबर आकार का वास्तविक प्रतिबिंबकिसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज़ का प्रतिबिंब पाने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?
बिंब को फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर, यानी 2F₁ पर रखिए।
तब प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 2F₂ पर बनता है और उसका आकार बिंब के बराबर होता है।
ऐसा प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा होगा, जिसे परदे पर लिया जा सकता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — आधा ढका हुआ लेंसकिसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस बिंब का पूरा प्रतिबिंब बना पाएगा?
लेंस के हर भाग से होकर बिंब के हर बिंदु की किरणें जाती हैं, किसी एक भाग से नहीं।
आधा भाग ढकने पर किरणों की संख्या आधी रह जाती है, पर उनके मिलने की जगह वही रहती है।
हाँ, पूरा प्रतिबिंब बनेगा, पर वह पहले से कम चमकीला होगा, क्योंकि अब लेंस तक कम प्रकाश पहुँच रहा है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)अवतल लेंस भी कभी-कभी वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। ❌
अवतल लेंस किरणों को फैलाता है, इसलिए उसका प्रतिबिंब सदा आभासी, सीधा और छोटा होता है।
अवतल लेंस का प्रतिबिंब सदा आभासी होता है।