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अपवर्तन के नियम और काँच का स्लैब

आज क्या सीखेंगे

अपवर्तन का अर्थ, उसके नियम और स्लैब से निर्गत किरण का व्यवहार समझाना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
पानी से भरे बर्तन की तली उठी हुई लगती है और उसमें रखी पेंसिल मुड़ी दिखाई देती है।
पेंसिल मुड़ी नहीं है—प्रकाश मुड़ा है। यही अपवर्तन है।
🧠 समझिए (Understand)
प्रकाश का एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाते समय अपने मार्ग से विचलित हो जाना अपवर्तन (Refraction) कहलाता है।
इसका कारण यह है कि अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की चाल अलग-अलग होती है।
विरल माध्यम से सघन माध्यम में तिरछी जाने वाली किरण अभिलंब की ओर झुक जाती है, जैसे वायु से काँच में जाते समय।
सघन माध्यम से विरल माध्यम में तिरछी जाने वाली किरण अभिलंब से परे हट जाती है, जैसे काँच से वायु में निकलते समय।
अभिलंब के अनुदिश आने वाली किरण, यानी जिसका आपतन कोण शून्य हो, बिना मुड़े सीधी निकल जाती है।
अपवर्तन का पहला नियम यह है कि आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा अभिलंब—तीनों एक ही तल में होते हैं।
दूसरा नियम, जिसे स्नेल का नियम कहते हैं, यह है कि आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है।
आयताकार काँच के स्लैब में अपवर्तन दो बार होता है—वायु-काँच अंतरापृष्ठ पर और काँच-वायु अंतरापृष्ठ पर। दोनों मोड़ विपरीत दिशा में होते हैं।
इसी कारण स्लैब से निकली निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर होती है, केवल बगल में थोड़ी खिसक जाती है—इसे पार्श्व विस्थापन कहते हैं।
आयताकार काँच के स्लैब से अपवर्तनकाँचअभिलंबआपतितनिर्गतirनिर्गत किरण आपतित किरण के समांतर होती है, केवल बगल में खिसक जाती है।
निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर, केवल खिसकी हुई।
सूत्र (Formula)
sin i / sin r = नियतांक
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले देखिए किरण विरल से सघन में जा रही है या सघन से विरल में।
  2. विरल से सघन हो तो अभिलंब की ओर झुकेगी।
  3. सघन से विरल हो तो अभिलंब से परे हटेगी।
उदाहरण 1 (Example 1) — वायु से जल में जाती किरण
वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या वह अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी?
जल वायु की तुलना में प्रकाशिक रूप से सघन माध्यम है, क्योंकि उसमें प्रकाश की चाल कम होती है।
विरल माध्यम से सघन माध्यम में तिरछी जाने वाली किरण सदा अभिलंब की ओर झुक जाती है।
किरण अभिलंब की ओर झुकेगी, क्योंकि जल में प्रवेश करते ही प्रकाश की चाल घट जाती है।
उदाहरण 2 (Example 2) — स्लैब से निर्गत किरण
काँच के आयताकार स्लैब से निकली किरण आपतित किरण के समांतर क्यों होती है?
वायु से काँच में प्रवेश करते समय किरण अभिलंब की ओर झुकती है।
काँच से वायु में निकलते समय वह उतनी ही मात्रा में अभिलंब से परे हट जाती है।
दोनों अंतरापृष्ठ समांतर हैं, इसलिए दोनों मोड़ बराबर पर विपरीत दिशा में होते हैं और एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।
इसीलिए निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर होती है, बस थोड़ी बगल में खिसकी रहती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
अभिलंब के अनुदिश आने वाली किरण भी मुड़ जाती है। ❌
जिसका आपतन कोण शून्य हो, वह किरण बिना मुड़े सीधी निकल जाती है।
लंबवत आपतित किरण का अपवर्तन नहीं होता।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

वायु से काँच में तिरछी प्रवेश करने वाली किरण—

सवाल 2

काँच के आयताकार स्लैब से निर्गत किरण—

सवाल 3

अपवर्तन का कारण क्या है?
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