📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)टॉर्च का स्विच दबाते ही बल्ब जल उठता है और छोड़ते ही बुझ जाता है।
स्विच दरअसल रास्ता जोड़ता-तोड़ता है। रास्ता पूरा हो तो आवेश बहता है, टूट जाए तो नहीं।
🧠 समझिए (Understand)किसी चालक में गतिशील इलेक्ट्रॉनों की धारा ही विद्युत धारा (Electric current) की रचना करती है।
विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर है। यदि किसी अनुप्रस्थ काट से समय t में आवेश Q प्रवाहित हो तो I = Q/t।
विद्युत आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है, जो लगभग 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉनों में समाए आवेश के तुल्य होता है; एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10⁻¹⁹ C आवेश होता है।
विद्युत धारा का मात्रक ऐम्पियर (A) है। 1 ऐम्पियर की धारा का अर्थ है प्रति सेकंड एक कूलॉम आवेश का प्रवाह, यानी 1 A = 1 C/s।
परिपाटी के अनुसार विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत मानी जाती है।
विद्युत परिपथ (Electric circuit) विद्युत धारा के प्रवाह का एक बंद और सतत पथ है। परिपथ कहीं से भी टूट जाए तो धारा बहना बंद कर देती है।
धारा मापने के लिए ऐमीटर का उपयोग किया जाता है और उसे सदा उसी परिपथ के श्रेणीक्रम में संयोजित करते हैं जिसकी धारा मापनी है।
उदाहरण 1 (Example 1) — बल्ब से प्रवाहित आवेशकिसी विद्युत बल्ब के तंतु में 0.5 A विद्युत धारा 10 मिनट तक प्रवाहित होती है। परिपथ से प्रवाहित आवेश का परिमाण ज्ञात कीजिए।
दिया है I = 0.5 A और t = 10 मिनट, जिसे सेकंड में बदलने पर t = 600 s मिलता है।
धारा की परिभाषा I = Q/t को पलटने पर Q = I × t।
मान रखने पर Q = 0.5 × 600 = 300 C।
परिपथ से 300 कूलॉम आवेश प्रवाहित हुआ।
उदाहरण 2 (Example 2) — एक कूलॉम में कितने इलेक्ट्रॉनएक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1.6 × 10⁻¹⁹ C होता है।
इसलिए इलेक्ट्रॉनों की संख्या n = कुल आवेश ÷ एक इलेक्ट्रॉन का आवेश = 1 ÷ (1.6 × 10⁻¹⁹)।
n ≈ 6.25 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन, यानी लगभग सवा छह अरब अरब इलेक्ट्रॉन मिलकर एक कूलॉम आवेश बनाते हैं।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा होती है। ❌
परिपाटी के अनुसार धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की विपरीत दिशा मानी जाती है।
धारा की दिशा इलेक्ट्रॉन प्रवाह के विपरीत होती है।