डोरी और तापन अवयव श्रेणीक्रम में हैं, इसलिए दोनों से एक ही धारा बहती है।
डोरी कॉपर की बनी होती है, जिसकी प्रतिरोधकता बहुत कम है, जबकि तापन अवयव नाइक्रोम जैसी मिश्रातु का होता है, जिसकी प्रतिरोधकता बहुत अधिक है।
H = I²Rt के अनुसार समान धारा और समय पर ऊष्मा प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती होती है।
उत्तर: अधिक प्रतिरोध वाला तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है, जबकि कम प्रतिरोध वाली डोरी में बहुत कम ऊष्मा बनती है और वह ठंडी बनी रहती है।
दिया है V = 50 V, Q = 96000 C और t = 1 घंटा = 3600 s।
आवेश स्थानांतरित करने में किया गया कार्य ही ऊष्मा में बदलता है, यानी H = V × Q।
मान रखने पर H = 50 × 96000 = 48,00,000 J।
उत्तर: उत्पन्न ऊष्मा 4.8 × 10⁶ जूल है।
दिया है R = 20 Ω, I = 5 A और t = 30 s।
जूल के तापन नियम से H = I²Rt।
मान रखने पर H = 5² × 20 × 30 = 25 × 20 × 30 = 15000 J।
उत्तर: 30 सेकंड में 15000 जूल, यानी 15 किलोजूल ऊष्मा उत्पन्न होती है।
ऊर्जा की दर को ही विद्युत शक्ति कहते हैं।
यदि V विभवांतर पर I धारा बह रही हो तो शक्ति P = V × I होती है।
ओम के नियम की सहायता से इसे P = I²R अथवा P = V²/R भी लिखा जा सकता है।
उत्तर: विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर P = VI से निर्धारित की जाती है और उसका मात्रक वाट है।
दिया है V = 220 V, I = 5.0 A और t = 2 घंटे।
शक्ति P = VI = 220 × 5.0 = 1100 W = 1.1 kW।
ऊर्जा = शक्ति × समय = 1.1 kW × 2 h = 2.2 kWh।
जूल में यह 2.2 × 3.6 × 10⁶ = 7.92 × 10⁶ J होती है।
उत्तर: मोटर की शक्ति 1100 वाट है और 2 घंटे में वह 2.2 किलोवाट घंटा, यानी लगभग 7.92 × 10⁶ जूल ऊर्जा उपभुक्त करता है।