सही विकल्प: (C) वेग तथा संवेग
चुंबकीय बल सदा गति की दिशा के लंबवत लगता है, इसलिए वह केवल दिशा बदलता है, चाल नहीं।
दिशा बदलने से वेग बदलता है और वेग बदलने से संवेग भी; द्रव्यमान और आवेश अपरिवर्तित रहते हैं। सही विकल्प (C)।
सही विकल्प: (D) ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर
कण धनावेशित है, इसलिए विद्युत धारा की दिशा उसकी गति की दिशा, यानी पश्चिम की ओर ही होगी।
बल, यानी विक्षेप की दिशा उत्तर की ओर है।
फ्लेमिंग के वामहस्त नियम में मध्यमा पश्चिम की ओर और अँगूठा उत्तर की ओर रखने पर तर्जनी ऊपर की ओर संकेत करती है। सही विकल्प (D)।
चालक पर लगने वाला बल धारा, चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता तथा क्षेत्र में स्थित चालक की लंबाई—तीनों के बढ़ने से बढ़ता है।
(i) धारा बढ़ाने पर बल बढ़ेगा, इसलिए छड़ का विस्थापन भी बढ़ जाएगा।
(ii) अधिक प्रबल चुंबक लेने पर क्षेत्र बढ़ेगा, इसलिए बल और विस्थापन दोनों बढ़ेंगे।
(iii) छड़ की लंबाई बढ़ाने पर क्षेत्र में स्थित चालक की लंबाई बढ़ जाएगी, इसलिए बल और विस्थापन फिर बढ़ेंगे।
उत्तर: तीनों ही स्थितियों में छड़ AB का विस्थापन बढ़ जाएगा।