बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि तीनों परस्पर लंबवत हों।
इस व्यवस्था में तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा दर्शाती है।
उत्तर: तब अँगूठा चालक पर आरोपित बल की दिशा, यानी चालक की गति की दिशा बता देता है—इसी को फ्लेमिंग का वामहस्त नियम कहते हैं।
जब कोई धारावाही कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखी जाती है कि उसकी भुजाएँ क्षेत्र की दिशा के लंबवत हों, तो उन पर बल लगता है।
कुंडली की दो विपरीत भुजाओं में धारा की दिशाएँ विपरीत होती हैं, इसलिए फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार उन पर विपरीत दिशाओं में बल लगते हैं।
ये दो विपरीत बल मिलकर एक बल-युग्म बनाते हैं।
उत्तर: यही बल-युग्म कुंडली को घुमा देता है—यही विद्युत मोटर का सिद्धांत है, जिसमें विद्युत ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में बदल जाती है।
कुंडली आधा चक्कर पूरा कर लेने पर उसकी दोनों भुजाओं की स्थिति आपस में बदल जाती है।
यदि धारा की दिशा वैसी ही रहे तो बल कुंडली को उलटी दिशा में घुमाने लगेंगे और घूर्णन रुक जाएगा।
विभक्त वलय हर आधे चक्कर पर कुंडली में धारा की दिशा उलट देता है, जिससे बलों की दिशा भी उलट जाती है।
उत्तर: इसी कारण कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है; इसीलिए विभक्त वलय को दिक्परिवर्तक भी कहते हैं।