क्षेत्र रेखाओं के गुण बताना और प्रबल-दुर्बल क्षेत्र पहचानना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
छड़ चुंबक पर कागज़ रखकर लौह-चूर्ण छितराइए और बोर्ड को थपथपाइए।
चूर्ण अपने आप एक पैटर्न में सज जाता है—वही पैटर्न चुंबकीय क्षेत्र का नक्शा है।
🧠 समझिए (Understand)
किसी चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसके बल का संसूचन किया जा सकता है, चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) कहलाता है।
दिक्सूचक की सुई स्वयं एक छोटा छड़ चुंबक है; चुंबक के पास लाने पर उस पर बल लगता है, इसलिए वह विक्षेपित हो जाती है।
चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण भी होता है और दिशा भी। किसी बिंदु पर क्षेत्र की दिशा वही मानी जाती है जिस ओर वहाँ रखी दिक्सूचक की सुई का उत्तर ध्रुव संकेत करता है।
जिन वक्रों द्वारा चुंबकीय क्षेत्र को निरूपित किया जाता है उन्हें चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहते हैं।
क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर तथा चुंबक के भीतर दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती हैं, इसलिए वे बंद वक्र बनाती हैं।
जहाँ क्षेत्र रेखाएँ पास-पास होती हैं वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है, और जहाँ वे दूर-दूर होती हैं वहाँ दुर्बल। ध्रुवों के पास वे सबसे पास-पास होती हैं।
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं। यदि वे ऐसा करतीं तो प्रतिच्छेद बिंदु पर रखी दिक्सूचक की सुई को एक साथ दो दिशाएँ दिखानी पड़तीं, जो संभव नहीं है।
बाहर N से S, भीतर S से N—रेखाएँ बंद लूप बनाती हैं।
✍️ कैसे करें (How to solve)
पहले चुंबक के ध्रुव पहचानिए।
फिर बाहर की रेखाएँ N से S की ओर खींचिए।
भीतर उन्हीं रेखाओं को S से N की ओर पूरा कीजिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — रेखाएँ प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को क्यों नहीं प्रतिच्छेद करतीं?
किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा वही होती है जो वहाँ रखी दिक्सूचक की सुई के उत्तर ध्रुव की दिशा है, और वह एक ही हो सकती है।
यदि दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करतीं तो उस बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं और सुई को एक साथ दोनों ओर संकेत करना पड़ता।
यह असंभव है, इसलिए दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
उदाहरण 2 (Example 2) — सुई विक्षेपित क्यों होती है
चुंबक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित क्यों हो जाती है?
दिक्सूचक की सुई स्वयं एक छोटा छड़ चुंबक है, जिसके अपने उत्तर और दक्षिण ध्रुव होते हैं।
चुंबक के पास लाने पर उसके क्षेत्र के कारण सुई के ध्रुवों पर बल लगता है—सजातीय ध्रुवों में प्रतिकर्षण और विजातीय में आकर्षण।
इसी बल के कारण सुई घूमकर क्षेत्र की दिशा में आ जाती है, यानी विक्षेपित हो जाती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
चुंबक के भीतर कोई क्षेत्र रेखा नहीं होती। ❌
रेखाएँ बंद वक्र हैं; भीतर वे दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर चलती हैं।
भीतर भी क्षेत्र रेखाएँ होती हैं, पर दिशा उलटी।
खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल
पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।