📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)1820 में ओर्स्टेड ने देखा कि धारावाही तार के पास रखी दिक्सूचक की सुई घूम जाती है।
यहीं से पता चला कि विद्युत और चुंबकत्व दो अलग चीज़ें नहीं हैं।
🧠 समझिए (Understand)किसी सीधे धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है और उसकी क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर संकेंद्री वृत्त होती हैं।
इन वृत्तों का केंद्र वही तार होता है, और तार से दूर जाने पर वृत्त बड़े होते जाते हैं, यानी क्षेत्र दुर्बल पड़ता जाता है—B तार से दूरी के व्युत्क्रम पर निर्भर करता है।
चालक से प्रवाहित धारा बढ़ाने पर किसी दिए गए बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र भी बढ़ जाता है, यानी B धारा के अनुक्रमानुपाती है।
क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम से ज्ञात की जाती है—तार को दाहिने हाथ में इस प्रकार पकड़िए कि अँगूठा विद्युत धारा की दिशा में हो; तब मुड़ी हुई अँगुलियाँ जिस ओर घूम रही हैं, वही चुंबकीय क्षेत्र की दिशा है।
धारा की दिशा उलट देने पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी उलट जाती है।
उदाहरण 1 (Example 1) — क्षेत्र की दिशा निकालनाकिसी सीधे तार में विद्युत धारा पूर्व से पश्चिम की ओर बह रही है। तार के ऊपर रखी दिक्सूचक की सुई पर क्षेत्र की दिशा क्या होगी?
दाहिने हाथ का अँगूठा धारा की दिशा में, यानी पूर्व से पश्चिम की ओर रखिए।
अब मुड़ी हुई अँगुलियाँ तार के चारों ओर जिस ओर घूमती हैं, वही क्षेत्र की दिशा है।
पूर्वी सिरे से देखने पर यह दिशा दक्षिणावर्त मिलती है।
तार के ऊपर के बिंदुओं पर क्षेत्र एक ओर और नीचे के बिंदुओं पर उसके विपरीत दिशा में होगा; पश्चिमी सिरे से देखने पर वही वामावर्त दिखेगा।
उदाहरण 2 (Example 2) — क्षेत्र किस पर निर्भर करता हैधारावाही तार के किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र किन बातों पर निर्भर करता है?
क्षेत्र धारा के अनुक्रमानुपाती होता है—धारा दोगुनी करने पर क्षेत्र भी दोगुना हो जाता है।
क्षेत्र तार से दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है—दूरी दोगुनी करने पर क्षेत्र आधा रह जाता है।
इसीलिए तार के बिल्कुल पास क्षेत्र सबसे प्रबल होता है और दूर जाते-जाते दुर्बल पड़ता जाता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)सीधे धारावाही तार के पास क्षेत्र रेखाएँ तार के समांतर होती हैं। ❌
वे तार के चारों ओर संकेंद्री वृत्त होती हैं, समांतर नहीं।
क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर संकेंद्री वृत्त होती हैं।