सही विकल्प: (B) बादलों वाले दिन
सौर जल तापक सूर्य के प्रकाश से ऊष्मा लेकर जल गरम करता है।
बादलों वाले दिन पर्याप्त सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता, इसलिए वह काम नहीं कर पाता। सही विकल्प (B)।
सही विकल्प: (C) नाभिकीय ऊर्जा
जैवमात्रा वह ईंधन है जो पौधों अथवा जंतुओं से प्राप्त होता है—लकड़ी, गोबर गैस और कोयला तीनों अंततः जैव पदार्थों से ही बने हैं।
नाभिकीय ऊर्जा परमाणु के नाभिक से मिलती है, किसी जैव पदार्थ से नहीं। सही विकल्प (C)।
सही विकल्प: (C) नाभिकीय ऊर्जा
पवन ऊर्जा और जैवमात्रा दोनों सूर्य के कारण ही बनती हैं।
भूतापीय तथा नाभिकीय—दोनों सूर्य से नहीं आतीं, पर दिए गए विकल्पों में नाभिकीय ऊर्जा का सौर ऊर्जा से कोई संबंध नहीं है। सही विकल्प (C)।
उपलब्धता—जीवाश्मी ईंधन सीमित हैं और कुछ ही सौ वर्षों में समाप्त हो जाएँगे, जबकि सूर्य अगले लगभग पाँच अरब वर्षों तक ऊर्जा देता रहेगा।
पुनर्जनन—जीवाश्मी ईंधन अनवीकरणीय हैं, जबकि सौर ऊर्जा नवीकरणीय तथा व्यावहारिक रूप से अक्षय है।
प्रदूषण—जीवाश्मी ईंधन जलने पर वायु प्रदूषण, अम्ल वर्षा तथा भूमंडलीय तापन का कारण बनते हैं, जबकि सौर ऊर्जा के उपयोग से कोई उत्सर्जन नहीं होता।
सुविधा—जीवाश्मी ईंधन दिन-रात और हर मौसम में उपलब्ध रहते हैं, जबकि सौर ऊर्जा रात में तथा बादलों वाले दिन नहीं मिलती और उसकी युक्तियाँ महँगी हैं।
उत्तर: जीवाश्मी ईंधन सुविधाजनक पर सीमित और प्रदूषणकारी हैं; सौर ऊर्जा स्वच्छ और अक्षय है, पर उसका दोहन अभी महँगा और मौसम पर निर्भर है।
स्रोत—जैवमात्रा पौधों तथा जंतुओं के अवशेषों से मिलती है, जबकि जल वैद्युत बाँध में संचित जल की स्थितिज ऊर्जा से।
दोनों ही नवीकरणीय हैं—जैवमात्रा वृक्ष लगाकर और जल वैद्युत वर्षा द्वारा पुनः भर जाती है।
प्रदूषण—जैवमात्रा जलाने पर धुआँ तथा कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, जबकि जल वैद्युत से कोई उत्सर्जन नहीं होता।
पैमाना—जैवमात्रा छोटे पैमाने पर, घरों और गाँवों के स्तर पर काम आती है, जबकि जल वैद्युत संयंत्र बहुत बड़ी मात्रा में विद्युत देता है, पर उसके लिए विशाल बाँध और भारी लागत चाहिए।
उत्तर: जैवमात्रा सरल और स्थानीय है पर प्रदूषणकारी; जल वैद्युत स्वच्छ और बड़े पैमाने की है पर उससे विस्थापन तथा पारितंत्र की क्षति जुड़ी है।