ओजोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बना O₃ अणु है।
ऊपरी वायुमंडल में इसकी परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोखती है। इससे मनुष्य, पौधे और अन्य जीव सुरक्षित रहते हैं।
ओजोन परत पतली होने पर अधिक UV धरातल तक पहुँचती है, जिससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और पौधों को क्षति का जोखिम बढ़ता है।
धरातल के पास ओजोन प्रदूषक और विषैली होती है; उसका प्रभाव स्थान पर निर्भर है।
सूर्य की पराबैंगनी ऊर्जा O₂ अणु को दो अलग ऑक्सीजन परमाणुओं में तोड़ती है: O₂ + UV → O + O।
मुक्त ऑक्सीजन परमाणु दूसरे O₂ अणु से जुड़ता है: O + O₂ → O₃।
इसी O₃ के बहुत से अणु ऊपरी वायुमंडल में ओजोन परत बनाते हैं।
पहला—एकबार उपयोग वाली वस्तुएँ और अनावश्यक पैकिंग कम करके टिकाऊ थैला, बोतल और बर्तन बार-बार उपयोग करूँगा।
दूसरा—गीले कचरे को कम्पोस्ट के लिए और सूखे/ई-कचरे को अलग संग्रह तथा अधिकृत पुनर्चक्रण के लिए दूँगा।
इनसे बनने वाले कचरे की मात्रा और खुले में जाने वाला कचरा, दोनों कम होते हैं।
रेफ्रिजरेटर और पुराने अग्निशामकों में प्रयुक्त क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) ऊपरी वायुमंडल तक पहुँच सकते हैं।
UV के प्रभाव से CFC से निकला क्लोरीन ओजोन अणुओं को तोड़ता है, जिससे ओजोन परत पतली होती है।
पतली परत अधिक हानिकारक UV को पृथ्वी तक आने देती है। इससे त्वचा कैंसर, आँखों की क्षति और पौधों तथा सूक्ष्मजीवों को नुकसान हो सकता है।
इसी चिंता के कारण 1987 में देशों ने CFC उत्पादन सीमित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाई।