📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)केले का छिलका मिट्टी में कुछ समय बाद सड़ जाता है, पर उसी मिट्टी में पड़ी प्लास्टिक की थैली वर्षों तक लगभग वैसी ही रह सकती है। दोनों के साथ अलग व्यवहार इसलिए होता है क्योंकि उन्हें तोड़ने वाले जीव और एंजाइम अलग होते हैं।
🧠 समझिए (Understand)वे पदार्थ जो जीवाणु, कवक और दूसरे अपघटकों की क्रिया से सरल पदार्थों में टूट जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) कहलाते हैं। भोजन का बचा भाग, कागज, कपड़ा और पत्तियाँ इसके उदाहरण हैं।
वे पदार्थ जो जैव प्रक्रमों से नहीं टूटते या अत्यंत धीमे टूटते हैं, अजैव निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) कहलाते हैं। प्लास्टिक, काँच और कई कीटनाशक इसके उदाहरण हैं।
एंजाइम (Enzyme) की क्रिया विशिष्ट होती है। अपघटकों के एंजाइम प्राकृतिक जैव पदार्थों को तोड़ सकते हैं, पर बहुत-से मानव निर्मित पदार्थों की रासायनिक बनावट उनके लिए अपरिचित होती है।
जैव निम्नीकरणीय कचरा भी अधिक मात्रा में जमा हो तो दुर्गंध, रोगाणु और ऑक्सीजन की कमी पैदा कर सकता है। इसलिए 'सड़ जाता है' का अर्थ 'कहीं भी फेंक सकते हैं' नहीं है।
उदाहरण 1 (Example 1) — केले का छिलका और प्लास्टिक थैलीदोनों को एक साथ मिट्टी में दबाया गया।
छिलके के कार्बनिक पदार्थों को सूक्ष्मजीव अपने एंजाइमों से तोड़ देते हैं।
प्लास्टिक आसानी से नहीं टूटता, इसलिए मिट्टी और नालियों में जमा रहता है।
छिलका जैव निम्नीकरणीय, प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)जैव निम्नीकरणीय कचरा पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुँचाता। ❌
बहुत अधिक गीला कचरा सड़ने पर दुर्गंध, मक्खियाँ और मीथेन उत्पन्न कर सकता है।
उसे अलग करके कम्पोस्ट या बायोगैस में बदलना चाहिए।