बिहार की पारंपरिक आहर-पईन व्यवस्था एक उपयुक्त उदाहरण है।
आहर मिट्टी का बड़ा जलाशय है जिसमें वर्षा या बाढ़ का अतिरिक्त जल जमा किया जाता है।
पईन छोटी नालियों का जाल है जो यह जल खेतों तक पहुँचाता है और कुछ जल जमीन में रिसकर भूजल भी भरता है।
इसकी सफाई, मरम्मत और जल वितरण समुदाय द्वारा मिलकर करने पर व्यवस्था लंबे समय तक काम करती है।
पहले स्रोत पहचानेंगे—कुआँ, हैंडपंप, पाइप, तालाब या नदी—और अलग बस्तियों की दूरी तथा पानी मिलने का समय दर्ज करेंगे।
गर्मी और वर्षा में उपलब्धता, पानी की गुणवत्ता, कीमत और कतार का समय तुलना करेंगे।
देखेंगे कि जाति, आय, स्थान या निजी स्वामित्व के कारण किसी समूह की पहुँच सीमित तो नहीं है।
इन तथ्यों के आधार पर ही समान उपलब्धता का निष्कर्ष देंगे; केवल स्रोत मौजूद होना पर्याप्त नहीं है।
पैमाना—स्थानीय प्रणाली छोटे जलग्रहण क्षेत्र के लिए होती है; बड़ा बाँध विशाल क्षेत्र और दूर की नहरों के लिए बनाया जाता है।
नियंत्रण—स्थानीय प्रणाली समुदाय सँभाल सकता है; बड़े बाँध का प्रबंधन प्रायः केंद्रीय संस्था करती है।
प्रभाव—स्थानीय संरचना का विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है; बड़े बाँध से वन और गाँव डूब सकते हैं।
लाभ—बड़ा बाँध अधिक बिजली और सिंचाई दे सकता है; स्थानीय प्रणाली भूजल पुनर्भरण और स्थानीय समान पहुँच में उपयोगी है।
निष्कर्ष: क्षेत्र की भू-आकृति, जरूरत और प्रभाव देखकर दोनों का उपयुक्त मेल चुनना चाहिए।
लाभ—जल संग्रह, सिंचाई, पेयजल, बाढ़ नियंत्रण में सहायता और जलविद्युत उत्पादन।
सामाजिक समस्या—किसान और आदिवासी विस्थापित होते हैं तथा पुनर्वास और मुआवजा अक्सर अपर्याप्त होता है।
आर्थिक समस्या—निर्माण में बहुत धन लगता है और कभी-कभी लागत के अनुपात में अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।
पर्यावरणीय समस्या—विशाल वन और कृषि भूमि डूबती है, आवास टूटते हैं और जैव विविधता घटती है।
निष्कर्ष: बाँध का मूल्यांकन लाभ के साथ यह देखकर करें कि लाभ किसे और हानि किसे होती है।
चेक डैम, तालाब या छोटा बाँध वर्षाजल के तेज बहाव को रोकता है।
रुके जल को मिट्टी और चट्टानों की दरारों से नीचे रिसने का समय मिलता है, जिससे भूजल स्तर बढ़ता है।
कुओं और झरनों में अधिक समय तक पानी रह सकता है और आसपास की वनस्पति को नमी मिलती है।
भूजल खुले जल की तरह तेजी से वाष्पित नहीं होता और मच्छरों के प्रजनन की खुली सतह भी नहीं बनाता।
उत्तर: स्थानीय जल संग्रहण पानी को सतही बहाव से सुरक्षित भूमिगत भंडार में पहुँचाता है।