यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका: किन्हीं भी दो धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए, a = bq + r और 0 ≤ r < b को पूरा करने वाले q और r हमेशा मौजूद रहते हैं।
यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म: इसी प्रमेयिका को बार-बार लगाकर दो धनात्मक पूर्णांकों का HCF निकाला जाता है — हर चरण में नया भाजक और शेषफल लेते जाएँ, जब तक शेषफल शून्य न हो; आख़िरी भाजक ही HCF है।
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय: 1 से बड़ी हर भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है, और क्रम को छोड़कर यह गुणनखंडन अद्वितीय होता है।
यदि कोई अभाज्य संख्या p किसी धनात्मक पूर्णांक a के वर्ग a² को पूरा-पूरा बाँटती है, तो वह a को भी बाँटती है।
इसी तथ्य का प्रयोग करके √2, √3 जैसी संख्याओं का अपरिमेय होना सिद्ध किया जाता है — परिमेय मानकर विरोध निकालने की विधि से।
यदि किसी परिमेय संख्या p/q (सरलतम रूप में) का हर q, 2ⁿ × 5ᵐ के रूप का है (n, m ऋणेतर पूर्णांक), तो उसका दशमलव प्रसार सांत होता है — और यह दोनों ओर से सच है: सांत दशमलव वाली हर संख्या का हर भी इसी रूप का निकलता है।
यदि हर q इस 2ⁿ × 5ᵐ रूप का न हो, तो दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होता है।
HCF × LCM = a × b का नियम केवल दो संख्याओं के लिए सच है; तीन संख्याओं p, q, r के लिए यह नहीं चलता (पाठ 1.3 की टिप्पणी देखें)।
स्वयं जाँचें: क्या नियम की शर्त बता सकते हैं, सही विधि चुन सकते हैं और अपना उत्तर वापस जाँच सकते हैं?
अंतिम पुनरावृत्ति में 18 प्रश्न हैं: 8 बहुविकल्पीय, 6 गणना, 2 शब्द-प्रश्न और 2 लिखित तर्क। इन्हें तीन-तीन के छोटे पन्नों में करें।
💡 टिप (Tip)
हर खंड के बाद सारांश पढ़ें। अंतिम पुनरावृत्ति में गणना के साथ कारण भी लिखें। प्रमाणों को मॉडल उत्तर से स्वयं मिलाएँ; केवल विकल्प सही चुनना पूरा प्रमाण लिख पाने का प्रमाण नहीं है।