बोर्ड परीक्षा में पूछा गया — 2026
2026 · 5 अंक
आर्हेनियस सिद्धांत (Arrhenius theory)
इस सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ हैं जो पानी में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) उत्पन्न करते हैं। ये आयन पानी के अणुओं से जुड़कर हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) बनाते हैं।
उदाहरण: अम्ल का आयनीकरण — हाइड्रोजन क्लोराइड पानी में घुलकर हाइड्रोनियम आयन और क्लोराइड आयन देता है: HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻। इसी कारण इसका जलीय विलयन अम्लीय होता है।
क्षार की परिभाषा — इस सिद्धांत के अनुसार, क्षार वे पदार्थ हैं जो पानी में घुलकर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए, NaOH → Na⁺ + OH⁻।
उदाहरण: क्षार का आयनीकरण — सोडियम हाइड्रॉक्साइड पानी में घुलकर सोडियम आयन और हाइड्रॉक्साइड आयन देता है। विलयन में OH⁻ आयन होने से वह क्षारीय होता है।
उदासीनीकरण — अम्ल के H⁺ आयन और क्षार के OH⁻ आयन मिलकर पानी बनाते हैं: H⁺ + OH⁻ → H₂O। इसलिए अम्ल और क्षार की अभिक्रिया से सामान्यतः लवण और पानी बनते हैं।
सिद्धांत की सीमा — आर्हेनियस सिद्धांत अम्ल और क्षार के व्यवहार को मुख्यतः जलीय विलयन में समझाता है, क्योंकि इसमें H⁺ या OH⁻ आयन पानी में उत्पन्न होते हैं।