किसी पदार्थ का अम्लीय गुण जल में बने H⁺(aq) आयनों के कारण होता है।
HCl और HNO₃ जल में घुलकर H⁺ देते हैं। ऐल्कोहॉल और ग्लूकोस में हाइड्रोजन तो है, पर वह जल में H⁺ के रूप में अलग नहीं होता।
उत्तर: क्योंकि HCl और HNO₃ जल में H⁺(aq) आयन देते हैं, जबकि ऐल्कोहॉल और ग्लूकोस नहीं देते। केवल हाइड्रोजन होने से कोई पदार्थ अम्ल नहीं बनता।
विलयन में विद्युत धारा आयनों के द्वारा बहती है।
अम्ल जल में H⁺(aq) और संगत ऋणायन देता है।
उत्तर: अम्ल जल में आयनित होकर H⁺(aq) तथा ऋणायन देता है; इन्हीं गतिशील आयनों के कारण उसका विलयन विद्युत का चालन करता है।
लिटमस का रंग H⁺ आयनों की उपस्थिति में बदलता है।
HCl अणु से H⁺ का अलग होना केवल जल की उपस्थिति में संभव है।
उत्तर: शुष्क अवस्था में जल न होने से HCl से H⁺ आयन बनते ही नहीं, इसलिए शुष्क लिटमस का रंग नहीं बदलता।
अम्ल को जल में घोलना अत्यधिक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है।
सांद्र अम्ल में जल डालने पर बहुत सारी ऊष्मा एक ही जगह निकलती है, जिससे मिश्रण उछलकर बाहर आ सकता है और काँच का बर्तन टूट सकता है।
उत्तर: अम्ल को धीरे-धीरे जल में डालने पर निकली ऊष्मा अधिक जल में फैल जाती है और ताप अचानक नहीं बढ़ता, इसलिए यही क्रम सुरक्षित है।
जल मिलाने से H₃O⁺ आयनों की कुल संख्या नहीं बदलती।
विलयन का आयतन बढ़ जाता है।
उत्तर: प्रति इकाई आयतन में H₃O⁺ की सांद्रता घट जाती है, इसलिए विलयन कम अम्लीय हो जाता है और उसका pH बढ़ता है।
प्रत्येक क्षारक जल में घुलकर OH⁻ आयन देता है।
अधिक क्षारक घुलने पर और अधिक OH⁻ आयन बनते हैं।
उत्तर: प्रति इकाई आयतन में OH⁻ की सांद्रता बढ़ जाती है, इसलिए विलयन अधिक क्षारीय हो जाता है और pH बढ़ता है।