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तनुकरण और उसमें निकलने वाली ऊष्मा (Dilution)

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आज क्या सीखेंगे

यह जानना कि अम्ल या क्षारक को जल में मिलाने पर क्या होता है और सुरक्षित तरीका क्या है।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
बीकर में 10 mL जल लेकर उसमें सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूँदें डालकर धीरे-धीरे हिलाइए और बीकर का तल छूइए—वह गर्म लगता है।
सांद्र अम्ल और क्षारक की बोतलों पर चेतावनी का चिह्न यूँ ही नहीं बना होता।
🧠 समझिए (Understand)
अम्ल या क्षारक को जल में घोलना अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Highly exothermic) प्रक्रिया है।
अम्ल को हमेशा धीरे-धीरे, लगातार हिलाते हुए जल में डालना चाहिए।
यदि सांद्र अम्ल में जल डाला जाए तो निकली ऊष्मा से मिश्रण उछलकर बाहर आ सकता है और जल सकता है; स्थानीय गर्मी से काँच का बर्तन भी टूट सकता है।
जल मिलाने पर प्रति इकाई आयतन में H₃O⁺ या OH⁻ आयनों की सांद्रता घट जाती है। इसी प्रक्रिया को तनुकरण (Dilution) कहते हैं।
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले बर्तन में जल लीजिए।
  2. अम्ल को दीवार के सहारे धीरे-धीरे जल में डालिए।
  3. लगातार हिलाते रहिए ताकि ऊष्मा एक जगह जमा न हो।
  4. कभी भी जल को सांद्र अम्ल में मत डालिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — तनु अम्ल बनाने का सही क्रम
एक छात्र को सांद्र H₂SO₄ से तनु अम्ल बनाना है।
पहले बीकर में जल लें, फिर उसमें अम्ल धीरे-धीरे डालें।
निकली ऊष्मा बहुत सारे जल में फैल जाती है, इसलिए तापमान अचानक बहुत नहीं बढ़ता।
अम्ल जल में, जल अम्ल में नहीं।
उदाहरण 2 (Example 2) — तनुकरण से सांद्रता पर प्रभाव
किसी अम्ल के विलयन में और जल मिलाया गया।
H₃O⁺ आयनों की कुल संख्या वही रहती है, पर आयतन बढ़ जाता है।
इसलिए प्रति इकाई आयतन में H₃O⁺ की सांद्रता घट जाती है।
तनुकरण से H₃O⁺ की सांद्रता घटती है और pH बढ़ता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
सांद्र अम्ल में जल डालकर उसे तनु कर लेते हैं। ❌
यह खतरनाक है। अचानक निकली ऊष्मा से मिश्रण छिटक सकता है।
हमेशा अम्ल को जल में, धीरे-धीरे और हिलाते हुए डालिए।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

तनु अम्ल बनाते समय सही तरीका कौन-सा है?

सवाल 2

अम्ल के विलयन को तनु करने पर H₃O⁺ की सांद्रता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

सवाल 3

अम्ल या क्षारक को जल में घोलना किस प्रकार की प्रक्रिया है?
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