📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)पेट में भोजन पचाने के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनता है। पर अपच में यह अम्ल ज़रूरत से ज़्यादा बन जाता है और जलन होती है।
ऐसे ही दाँत, खेत की मिट्टी, नदी का पानी और मधुमक्खी का डंक—सब जगह pH का हिसाब चल रहा होता है।
🧠 समझिए (Understand)हमारा शरीर 7.0 से 7.8 के बीच की सँकरी pH सीमा में ही ठीक से काम करता है।
वर्षा जल का pH 5.6 से कम हो जाए तो उसे अम्ल वर्षा (Acid rain) कहते हैं। ऐसा पानी नदी में जाकर उसका pH घटा देता है, जिससे जलीय जीवों का जीवित रहना कठिन हो जाता है।
पौधों को स्वस्थ वृद्धि के लिए एक निश्चित pH सीमा चाहिए। मिट्टी अधिक अम्लीय हो तो किसान उसमें बिना बुझा चूना (CaO), बुझा चूना [Ca(OH)₂] या खड़िया (CaCO₃) मिलाता है।
अपच में पेट के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करने के लिए ऐन्टैसिड लिया जाता है। मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) एक हल्का क्षारक है और इसी काम आता है।
मुँह का pH 5.5 से नीचे जाते ही दंत क्षय (Tooth decay) शुरू होता है। दाँत का इनैमल कैल्सियम फॉस्फेट का बना होता है—शरीर का सबसे कठोर पदार्थ—जो जल में नहीं घुलता पर इस pH से नीचे संक्षारित हो जाता है।
मुँह के जीवाणु बचे हुए भोजन और शर्करा के अपघटन से अम्ल बनाते हैं। इसीलिए खाने के बाद मुँह साफ करना और क्षारीय दंतमंजन का प्रयोग दाँतों को बचाता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — अम्लीय मिट्टी का उपचारकिसान के खेत की मिट्टी बहुत अम्लीय है और फसल ठीक नहीं हो रही।
मिट्टी का pH 7 से काफी कम है, यानी उसमें H⁺ अधिक हैं।
क्षारीय पदार्थ—बिना बुझा चूना, बुझा चूना या खड़िया—मिलाने पर अतिरिक्त अम्ल उदासीन हो जाता है।
मिट्टी का pH बढ़कर पौधों के लिए उपयुक्त सीमा में आ जाता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — दूध से दही बनने पर pHताज़े दूध का pH 6 है। उसे जमाकर दही बनाया गया।
दही बनने में लैक्टिक अम्ल (Lactic acid) बनता है, इसलिए H⁺ बढ़ जाते हैं।
H⁺ बढ़ने का अर्थ है pH का घटना, इसलिए pH 6 से भी कम हो जाएगा।
दही का pH ताज़े दूध से कम होता है, क्योंकि उसमें अम्ल बन जाता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)मधुमक्खी के डंक पर नींबू का रस लगाना चाहिए। ❌
डंक में अम्ल होता है और नींबू भी अम्लीय है, इससे जलन और बढ़ेगी।
डंक पर खाने का सोडा जैसा हल्का क्षारक लगाइए।