आयनिक यौगिक का बनना (Formation of Ionic Compounds)
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आज क्या सीखेंगे
इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण से धनायन और ऋणायन बनना तथा आयनिक यौगिक का सूत्र समझना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
सोडियम के बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन है और क्लोरीन के बाहरी कोश में सात—यानी उसे एक और चाहिए।
एक के पास फालतू है, दूसरे को कमी है। दोनों मिलें तो दोनों का काम बन जाता है—यही नमक बनने की पूरी कहानी है।
🧠 समझिए (Understand)
अक्रिय गैसों का बाहरी कोश पूरा भरा होता है, इसलिए वे रासायनिक रूप से निष्क्रिय रहती हैं। बाकी तत्व भी वही पूर्ण बाहरी कोश पाना चाहते हैं—यही उनकी क्रियाशीलता का कारण है।
सोडियम (2,8,1) अपना एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na⁺ बनाता है, जिसका विन्यास (2,8) हो जाता है। नाभिक में 11 प्रोटॉन रहते हैं पर इलेक्ट्रॉन 10 रह जाते हैं, इसलिए एक इकाई धनावेश आ जाता है।
क्लोरीन (2,8,7) एक इलेक्ट्रॉन लेकर Cl⁻ बनाता है, जिसका विन्यास (2,8,8) हो जाता है और एक इकाई ऋणावेश आ जाता है।
विपरीत आवेश वाले ये आयन प्रबल स्थिर वैद्युत बल (Electrostatic force) से बँधकर सोडियम क्लोराइड बनाते हैं।
ध्यान रहे कि NaCl अणुओं के रूप में नहीं, बल्कि विपरीत आवेशित आयनों के समूह के रूप में रहता है।
धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण से बने ऐसे यौगिक आयनिक यौगिक (Ionic compounds) या विद्युत संयोजक यौगिक (Electrovalent compounds) कहलाते हैं।
सोडियम अपना एक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को देकर Na⁺ और Cl⁻ बनाता है।