📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)एथनॉल कक्ष के ताप पर द्रव है और सामान्यतः इसे ऐल्कोहॉल कहा जाता है। यह सभी ऐल्कोहॉली पेय पदार्थों का महत्वपूर्ण अवयव है।
यही पदार्थ दवा उद्योग में विलायक के रूप में भी काम आता है—और अधिक मात्रा में शरीर के लिए हानिकारक भी है।
🧠 समझिए (Understand)एथनॉल का सूत्र C₂H₅OH है। इसका प्रकार्यात्मक समूह −OH यानी हाइड्रॉक्सिल है।
सोडियम के साथ अभिक्रिया करके यह सोडियम एथॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस देता है। यही अभिक्रिया ऐल्कोहॉल की पहचान के काम आती है।
443 K पर सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर एथनॉल का निर्जलीकरण होकर एथीन बनता है। यहाँ सांद्र H₂SO₄ निर्जलीकारक का काम करता है।
एथनॉल का अधिक मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और उससे तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है।
मेथेनॉल बहुत कम मात्रा में भी घातक है—यह यकृत में ऑक्सीकृत होकर मेथेनल बनाता है, जिससे कोशिकाएँ नष्ट हो सकती हैं और दृष्टि तक जा सकती है।
शुद्ध एथनॉल को पीने योग्य न रहने देने के लिए उसमें मेथेनॉल जैसे विषैले पदार्थ मिला दिए जाते हैं; इसे विकृतिकृत स्पिरिट (Denatured spirit) कहते हैं और पहचान के लिए उसमें रंग भी मिलाया जाता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — एथनॉल और सोडियमएथनॉल में सोडियम का टुकड़ा डालने पर क्या होता है?
बुलबुले उठने लगते हैं, जो हाइड्रोजन गैस के हैं।
बचा हुआ उत्पाद सोडियम एथॉक्साइड है।
2Na + 2C₂H₅OH → 2C₂H₅ONa + H₂
उदाहरण 2 (Example 2) — एथनॉल का निर्जलीकरणएथनॉल को सांद्र H₂SO₄ के साथ 443 K पर गर्म किया गया।
सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल एथनॉल से जल का अणु हटा देता है, इसलिए इसे निर्जलीकारक कहते हैं।
जल हटने पर बचे हुए भाग में द्वि-आबंध बन जाता है।
C₂H₅OH → C₂H₄ + H₂O, यानी एथीन बनता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)विकृतिकृत स्पिरिट पीने योग्य एथनॉल है। ❌
उसमें जानबूझकर मेथेनॉल जैसे विषैले पदार्थ मिलाए जाते हैं ताकि वह पीने योग्य न रहे।
विकृतिकृत स्पिरिट विषैला होता है और केवल औद्योगिक उपयोग के लिए है।