स्तनधारी और पक्षी अपने शरीर का ताप स्थिर बनाए रखते हैं, जिसके लिए उन्हें बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए।
अधिक ऊर्जा के लिए अधिक ऑक्सीजन चाहिए, और वह तभी मिलेगी जब शरीर में जाने वाला रुधिर पूरी तरह ऑक्सीजनित हो।
उत्तर: दोनों प्रकार का रुधिर मिल जाने पर शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती, इसलिए उन्हें अलग रखना आवश्यक है। इसी कारण उनमें दोहरा परिसंचरण होता है।
उच्च संगठित पादपों में परिवहन का कार्य संवहन ऊतक करता है।
उत्तर: इसके दो घटक हैं—जाइलम, जो जड़ों से जल और खनिज लवणों का वहन ऊपर की ओर करता है, तथा फ्लोएम, जो पत्तियों में बने भोजन को पौधे के बाकी भागों तक पहुँचाता है।
जड़ की कोशिकाएँ मिट्टी से आयन लेती हैं, जिससे जड़ और मिट्टी के बीच सांद्रता का अंतर बनता है और जल जड़ में आ जाता है।
इससे जाइलम में एक दाब बनता है, जो जल को कुछ ऊँचाई तक चढ़ा देता है।
ऊँचे पौधों में पत्तियों के रंध्रों से जल वाष्प बनकर निकलता रहता है और उससे बना खिंचाव जल को ऊपर खींच लेता है।
उत्तर: मूल दाब और वाष्पोत्सर्जन खिंचाव—दोनों मिलकर जाइलम द्वारा जल तथा खनिज लवणों को जड़ से पत्तियों तक पहुँचाते हैं।
पत्तियों में बना भोजन फ्लोएम द्वारा पौधे के बाकी भागों तक पहुँचाया जाता है; इस क्रिया को स्थानांतरण कहते हैं।
यह एक सक्रिय प्रक्रिया है, जिसमें ATP से ऊर्जा खर्च होती है।
उत्तर: फ्लोएम ATP की ऊर्जा से भोजन का स्थानांतरण करता है, और यह दोनों दिशाओं में हो सकता है—जड़ की ओर भी और फल-कलियों की ओर भी।
वहन तंत्र के तीन मुख्य घटक हैं—हृदय, रुधिर तथा रुधिर वाहिकाएँ।
हृदय एक पंप की तरह काम करता है, जो रुधिर को पूरे शरीर में भेजता है और वापस लेता है।
रुधिर ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पचा हुआ भोजन तथा उत्सर्जी उत्पादों का वहन करता है।
रुधिर वाहिकाओं में धमनियाँ हृदय से रुधिर ले जाती हैं, शिराएँ उसे वापस लाती हैं और एक कोशिका मोटी कोशिकाएँ पदार्थों के विनिमय का काम करती हैं।
उत्तर: हृदय पंप करता है, रुधिर वाहक है और वाहिकाएँ रास्ता बनाती हैं—तीनों मिलकर वहन तंत्र पूरा करते हैं।