सही विकल्प: (C) उत्सर्जन
वृक्क रुधिर से नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ छानकर मूत्र बनाते हैं।
यह काम उत्सर्जन तंत्र का है।
सही विकल्प: (A) जल का वहन
जाइलम जड़ों से जल और खनिज लवणों का वहन ऊपर की ओर करता है।
भोजन का वहन फ्लोएम करता है।
सही विकल्प: (D) उपरोक्त सभी
CO₂ और जल कच्ची सामग्री हैं, जबकि सूर्य का प्रकाश और क्लोरोफिल आवश्यक परिस्थितियाँ।
इनमें से एक भी न हो तो प्रकाशसंश्लेषण नहीं होगा।
सही विकल्प: (B) माइटोकॉन्ड्रिया
ग्लूकोज़ से पाइरुवेट बनना कोशिकाद्रव्य में होता है।
उसके बाद ऑक्सीजन की उपस्थिति में पाइरुवेट का पूर्ण विखंडन माइटोकॉन्ड्रिया में होता है।
वसा का पाचन क्षुद्रांत्र में होता है।
वहाँ वसा बड़ी गोलिकाओं के रूप में आती है, जिस पर एंजाइम आसानी से काम नहीं कर पाते।
यकृत से आया पित्त लवण इन्हें छोटी-छोटी गोलिकाओं में तोड़ देता है—यही इमल्सीकरण है।
उत्तर: इसके बाद अग्न्याशय का लाइपेज़ एंजाइम इमल्सीकृत वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देता है। पूरा प्रक्रम क्षुद्रांत्र में होता है।
लार ग्रंथियों से स्रावित लार भोजन को गीला और चिकना बना देती है, जिससे वह आसानी से निगला जा सके।
लार में लार ऐमिलेज़ नामक एंजाइम होता है।
उत्तर: यह एंजाइम स्टार्च जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट को शर्करा में तोड़ देता है। इसीलिए रोटी को देर तक चबाने पर वह मीठी लगने लगती है।
आवश्यक कच्ची सामग्री कार्बन डाइऑक्साइड और जल है।
आवश्यक परिस्थितियाँ सूर्य का प्रकाश और पर्णहरित हैं।
उत्तर: मुख्य उत्पाद कार्बोहाइड्रेट है, जो स्टार्च के रूप में संचित हो जाता है, और उपोत्पाद ऑक्सीजन है।