मेरुरज्जु में ही संवेदी तंत्रिका से प्रेरक तंत्रिका तक संदेश पहुँचता है, और यहीं प्रतिवर्ती चाप पूरा होता है।
मेरुरज्जु से ही होकर संवेदी संकेत मस्तिष्क तक जाते हैं और मस्तिष्क से प्रेरक संकेत पेशियों तक आते हैं।
उत्तर: आघात लगने पर प्रतिवर्ती क्रियाएँ नहीं हो पाएँगी, तथा शरीर से मस्तिष्क तक जाने वाले संवेदी संकेत और मस्तिष्क से पेशियों तक आने वाले प्रेरक संकेत—दोनों में व्यवधान होगा।
पादपों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, इसलिए समन्वय का पूरा काम रसायनों से होता है।
ये रसायन, यानी पादप हॉर्मोन, पौधे के एक भाग में बनकर दूसरे भाग तक फैल जाते हैं।
ऑक्सिन वृद्धि बढ़ाता है, जिबरेलिन तने की वृद्धि में, साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन में सहायक है और ऐब्सिसिक अम्ल वृद्धि का संदमन करता है।
उत्तर: पादप हॉर्मोन ही पादपों में वृद्धि, विकास तथा उद्दीपन के प्रति अनुक्रियाओं का समन्वय करते हैं।
जीव के शरीर में अनेक अंग और ऊतक एक साथ काम करते हैं, और उनका काम आपस में मेल खाना चाहिए।
पर्यावरण लगातार बदलता रहता है, इसलिए जीव को उद्दीपन के प्रति उचित अनुक्रिया करनी होती है।
उत्तर: नियंत्रण एवं समन्वय का तंत्र ही शरीर की सभी क्रियाओं में तालमेल बिठाता है और जीव को बदलते पर्यावरण में सुरक्षित रहने तथा जीवित बने रहने में सहायता करता है।
दोनों ही हमारी इच्छा के बिना होती हैं, इसलिए भ्रम होता है।
अनैच्छिक क्रियाएँ, जैसे हृदय का धड़कना और श्वसन, लगातार चलती रहती हैं और उनका नियंत्रण पश्चमस्तिष्क के मेडुला से होता है।
प्रतिवर्ती क्रियाएँ किसी उद्दीपन के प्रति तत्काल होने वाली अनुक्रिया हैं और उनका चाप मेरुरज्जु में पूरा होता है।
उत्तर: अनैच्छिक क्रियाएँ उद्दीपन के बिना भी लगातार चलती रहती हैं और मेडुला से नियंत्रित होती हैं, जबकि प्रतिवर्ती क्रियाएँ किसी उद्दीपन पर ही होती हैं और मेरुरज्जु से नियंत्रित होती हैं।
समानता यह है कि दोनों ही शरीर की क्रियाओं में नियंत्रण और समन्वय का काम करते हैं और दोनों में संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचता है।
तंत्रिका तंत्र संदेश विद्युत आवेग के रूप में भेजता है, जो बहुत तेज़ होता है; हॉर्मोन रुधिर द्वारा जाते हैं, इसलिए धीमे पहुँचते हैं।
तंत्रिका संदेश केवल तंत्रिका से जुड़ी कोशिकाओं तक ही पहुँचता है, जबकि हॉर्मोन शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँच सकते हैं।
तंत्रिका अनुक्रिया का प्रभाव अल्पकालिक होता है, जबकि हॉर्मोन का प्रभाव दीर्घकालिक।
उत्तर: तंत्रिका क्रियाविधि तेज़ पर सीमित और अल्पकालिक है, जबकि हॉर्मोन क्रियाविधि धीमी पर व्यापक और दीर्घकालिक। दोनों मिलकर ही पूरा समन्वय करते हैं।
हमारी टाँग की गति एक ऐच्छिक क्रिया है, जिसका निर्णय अग्रमस्तिष्क करता है और संदेश तंत्रिका तंत्र द्वारा विद्युत आवेग के रूप में पेशी तक पहुँचता है।
पेशी कोशिकाओं में विशेष प्रोटीन होती है, जो आवेग मिलते ही अपनी व्यवस्था बदल देती है और कोशिका की आकृति बदलने से गति होती है।
छुई-मुई में न तंत्रिका तंत्र होता है, न पेशी। वहाँ स्पर्श की सूचना विद्युत-रासायनिक संकेत के रूप में एक कोशिका से दूसरी तक जाती है।
पत्ती के आधार की कोशिकाएँ अपना जल बाहर निकालकर सिकुड़ जाती हैं, जिससे पत्ती झुक जाती है; यह गति अनैच्छिक है और वृद्धि से मुक्त।
उत्तर: हमारी गति तंत्रिका नियंत्रण में प्रोटीन की व्यवस्था बदलने से होती है, जबकि छुई-मुई की गति बिना तंत्रिका तंत्र के, कोशिकाओं में जल की मात्रा बदलने से।