📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)गर्म बर्तन छूते ही हाथ अपने आप हट जाता है—हम सोचते भी नहीं, और हाथ हट चुका होता है।
यदि संदेश पहले मस्तिष्क तक जाता, वहाँ निर्णय होता, फिर वापस आता, तो उतनी देर में हाथ जल चुका होता।
🧠 समझिए (Understand)उद्दीपन के प्रति तत्काल होने वाली अनैच्छिक अनुक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex action) कहते हैं।
जिस पथ से यह संदेश जाता है उसे प्रतिवर्ती चाप (Reflex arc) कहते हैं।
रास्ता यह है: ग्राही उद्दीपन पकड़ता है, संवेदी तंत्रिका सूचना मेरुरज्जु तक ले जाती है, वहीं से प्रेरक तंत्रिका आदेश लेकर पेशी तक जाती है और पेशी क्रिया कर देती है।
मेरुरज्जु में ही यह चाप पूरा हो जाता है; संदेश मस्तिष्क तक नहीं जाता। इसी से अनुक्रिया इतनी तेज़ होती है।
मस्तिष्क को इसकी सूचना बाद में मिलती है, इसलिए हमें दर्द का अनुभव हाथ हटने के बाद होता है।
ऐच्छिक क्रिया में निर्णय मस्तिष्क से होता है, जैसे लिखना या चलना। अनैच्छिक क्रिया हमारे नियंत्रण में नहीं होती, जैसे हृदय का धड़कना।
उदाहरण 1 (Example 1) — प्रतिवर्ती क्रिया और टहलने में अंतरदोनों में पेशी ही काम करती है, फिर फर्क कहाँ है?
प्रतिवर्ती क्रिया अनैच्छिक है—उसमें निर्णय मेरुरज्जु में होता है और हमें सोचने का मौका नहीं मिलता।
टहलना ऐच्छिक क्रिया है—उसका निर्णय अग्रमस्तिष्क करता है और हम चाहें तो रुक सकते हैं।
अंतर निर्णय के स्थान का है—मेरुरज्जु बनाम मस्तिष्क।
उदाहरण 2 (Example 2) — मेरुरज्जु आघात का प्रभावमेरुरज्जु में चोट लगने पर क्या होगा?
मेरुरज्जु में ही संवेदी तंत्रिका से प्रेरक तंत्रिका तक संदेश पहुँचता है।
चोट लगने पर यह जोड़ टूट जाता है, इसलिए प्रतिवर्ती क्रियाएँ नहीं हो पातीं।
मेरुरज्जु से होकर मस्तिष्क तक जाने वाले संवेदी संकेत और मस्तिष्क से पेशियों तक आने वाले प्रेरक संकेत—दोनों में व्यवधान होगा।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क निर्णय लेता है। ❌
निर्णय मेरुरज्जु में होता है; मस्तिष्क को सूचना बाद में मिलती है।
प्रतिवर्ती क्रिया का चाप मेरुरज्जु में पूरा होता है।