📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)फूल केवल सुंदरता के लिए नहीं होता—वह पौधे का जनन अंग है।
उसके भीतर नर और मादा दोनों भाग होते हैं, और उन्हीं से बीज और फल बनते हैं।
🧠 समझिए (Understand)पुंकेसर पुष्प का नर जनन भाग है, जिसमें परागकोश और तंतु होते हैं। परागकोश में पीले रंग के परागकण बनते हैं।
स्त्रीकेसर पुष्प का मादा जनन भाग है, जिसके तीन हिस्से हैं—सबसे ऊपर वर्तिकाग्र, बीच में वर्तिका और नीचे फूला हुआ अंडाशय। अंडाशय के भीतर बीजांड होते हैं।
जिस पुष्प में केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर हो वह एकलिंगी है; जिसमें दोनों हों वह द्विलिंगी है।
परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण परागण (Pollination) कहलाता है। यदि यह उसी पुष्प में हो तो स्वपरागण और किसी दूसरे पुष्प पर हो तो परपरागण कहलाता है।
परपरागण वायु, जल अथवा कीटों द्वारा होता है।
वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद परागकण से एक परागनलिका निकलती है, जो वर्तिका से होते हुए अंडाशय में बीजांड तक पहुँच जाती है। वहाँ नर युग्मक और अंडकोशिका का संलयन होता है—इसी को निषेचन (Fertilisation) कहते हैं।
निषेचन के बाद युग्मनज से भ्रूण बनता है, बीजांड बीज में और अंडाशय फल में बदल जाता है। पुष्प के बाकी भाग सामान्यतः झड़ जाते हैं।
उदाहरण 1 (Example 1) — परागण और निषेचन में अंतरदोनों अलग-अलग कैसे हैं?
परागण में परागकण केवल परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं; यह एक स्थानांतरण है और वायु, जल या कीटों से होता है।
निषेचन में नर युग्मक और अंडकोशिका का संलयन होता है, जो अंडाशय के भीतर बीजांड में होता है।
परागण पहले होता है और निषेचन उसके बाद; निषेचन के बिना बीज नहीं बनता।
उदाहरण 2 (Example 2) — निषेचन के बाद क्या बनता हैफूल से फल तक का रास्ता क्या है?
निषेचन के बाद बना युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण बनाता है।
बीजांड एक मोटे आवरण के साथ बीज में बदल जाता है।
अंडाशय तेज़ी से बढ़कर फल बन जाता है, जबकि दल, बाह्यदल और पुंकेसर झड़ जाते हैं।
इसलिए बीज बीजांड से और फल अंडाशय से बनता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)परागण और निषेचन एक ही प्रक्रिया है। ❌
परागण केवल परागकण का पहुँचना है; निषेचन युग्मकों का मिलना है और वह बाद में होता है।
पहले परागण, फिर निषेचन।