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प्रकाश का प्रकीर्णन—नीला आकाश और रक्ताभ सूर्य

आज क्या सीखेंगे

प्रकीर्णन का नियम समझकर आकाश के रंग और सूर्यास्त की व्याख्या करना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
दिन में आकाश नीला है, सूर्यास्त के समय लाल, और अंतरिक्ष में काला।
तीनों का उत्तर एक ही वाक्य में है—कम तरंगदैर्ध्य का प्रकाश अधिक प्रकीर्ण होता है।
🧠 समझिए (Understand)
जब प्रकाश वायुमंडल के सूक्ष्म कणों से टकराकर सब दिशाओं में बिखर जाता है, तो उसे प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering) कहते हैं।
प्रकीर्ण प्रकाश का रंग इस बात पर निर्भर करता है कि कण कितने बड़े हैं। अत्यंत सूक्ष्म कण मुख्यतः कम तरंगदैर्ध्य वाले नीले प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं, जबकि बड़े कण अधिक तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश का भी।
किसी कोलॉइडी विलयन में कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन से प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है, जिसे टिंडल प्रभाव (Tyndall effect) कहते हैं। घने वन में धुंध के बीच से आती सूर्य की किरणें इसी का उदाहरण हैं।
वायुमंडल के अणु बहुत सूक्ष्म हैं, इसलिए वे नीले प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक करते हैं। यही प्रकीर्ण नीला प्रकाश हमारी आँखों तक चारों ओर से पहुँचता है, इसलिए स्वच्छ आकाश नीला दिखाई देता है।
यदि वायुमंडल न होता तो प्रकीर्णन भी न होता और आकाश काला दिखाई देता। इसीलिए किसी अंतरिक्षयात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला प्रतीत होता है।
सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का प्रकाश वायुमंडल की मोटी परतों से होकर आता है, इसलिए उसका नीला तथा कम तरंगदैर्ध्य वाला अधिकांश भाग रास्ते में ही प्रकीर्ण हो जाता है।
हम तक मुख्यतः अधिक तरंगदैर्ध्य वाला लाल प्रकाश पहुँचता है, इसलिए उस समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है। दोपहर में सूर्य श्वेत दिखता है, क्योंकि तब प्रकाश को वायुमंडल में कम दूरी तय करनी पड़ती है।
खतरे के संकेत लाल रंग के बनाए जाते हैं, क्योंकि लाल प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे कम होता है और वह कोहरे या धुंध में भी दूर से दिखाई देता है।
सूत्र (Formula)
तरंगदैर्ध्य कम → प्रकीर्णन अधिक
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले बताइए प्रकाश को कितनी दूरी तय करनी है।
  2. फिर देखिए कौन-सा रंग रास्ते में प्रकीर्ण हो गया।
  3. जो रंग बचकर नेत्र तक पहुँचा, वही दिखाई देगा।
उदाहरण 1 (Example 1) — सूर्योदय का रक्ताभ सूर्य
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
क्षितिज के समीप स्थित सूर्य का प्रकाश हमारे नेत्रों तक पहुँचने से पहले वायुमंडल की मोटी परतों से होकर गुजरता है।
इतनी लंबी यात्रा में नीले तथा कम तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश का अधिकांश भाग रास्ते में ही प्रकीर्ण हो जाता है।
इसलिए हमारे नेत्रों तक मुख्यतः अधिक तरंगदैर्ध्य वाला लाल प्रकाश ही पहुँच पाता है।
इसी कारण सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है, जबकि दोपहर में वह श्वेत दिखता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — अंतरिक्ष में काला आकाश
किसी अंतरिक्षयात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है?
आकाश का नीला रंग वायुमंडल के सूक्ष्म कणों द्वारा नीले प्रकाश के प्रकीर्णन से बनता है।
अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं होता, इसलिए वहाँ प्रकीर्णन के लिए कोई कण ही नहीं हैं।
प्रकीर्णन न होने से कोई प्रकाश चारों ओर से नेत्र तक नहीं पहुँचता, इसलिए अंतरिक्षयात्री को आकाश काला दिखाई देता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
आकाश नीला इसलिए है क्योंकि वह समुद्र का रंग दर्शाता है। ❌
आकाश का नीला रंग वायुमंडल के कणों द्वारा नीले प्रकाश के अधिक प्रकीर्णन का परिणाम है।
आकाश का नीला रंग प्रकीर्णन से बनता है।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है?

सवाल 2

कोलॉइडी विलयन में प्रकाश का मार्ग दिखाई देना क्या कहलाता है?

सवाल 3

खतरे के संकेत लाल रंग के क्यों बनाए जाते हैं?
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