भूमिका (Background)आँख दूर का पहाड़ भी देख लेती है और हाथ में पकड़ी किताब भी—वह भी बिना किसी लेंस को बदले। यह कैसे होता है? और यदि यह व्यवस्था बिगड़ जाए तो चश्मा क्यों लगाना पड़ता है? इस अध्याय में हम पहले नेत्र की बनावट और समंजन क्षमता देखेंगे, फिर तीनों दृष्टि दोष और उनका संशोधन, उसके बाद प्रिज़्म से अपवर्तन, श्वेत प्रकाश का विक्षेपण, वायुमंडलीय अपवर्तन और अंत में प्रकीर्णन—यानी आकाश नीला और सूर्यास्त का सूर्य लाल क्यों दिखता है। हर तकनीकी शब्द के साथ जरूरी अंग्रेज़ी शब्द भी कोष्ठक में दिया गया है।