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अध्ययन और अभ्यास (Study and Exercise)

एक-एक करके
भूमिका (Background)
आँख दूर का पहाड़ भी देख लेती है और हाथ में पकड़ी किताब भी—वह भी बिना किसी लेंस को बदले। यह कैसे होता है? और यदि यह व्यवस्था बिगड़ जाए तो चश्मा क्यों लगाना पड़ता है? इस अध्याय में हम पहले नेत्र की बनावट और समंजन क्षमता देखेंगे, फिर तीनों दृष्टि दोष और उनका संशोधन, उसके बाद प्रिज़्म से अपवर्तन, श्वेत प्रकाश का विक्षेपण, वायुमंडलीय अपवर्तन और अंत में प्रकीर्णन—यानी आकाश नीला और सूर्यास्त का सूर्य लाल क्यों दिखता है। हर तकनीकी शब्द के साथ जरूरी अंग्रेज़ी शब्द भी कोष्ठक में दिया गया है।

मानव नेत्र (The Human Eye)

नेत्र की संरचना और उसके भागसमंजन क्षमता और निकट बिंदु

दृष्टि दोष तथा उनका संशोधन (Defects of Vision and their Correction)

निकट-दृष्टि दोष और उसका संशोधनदीर्घ-दृष्टि दोष तथा जरा-दूरदृष्टिताप्रश्नावली 11.116 सवाल · उत्तर सहित

प्रिज़्म, विक्षेपण और इंद्रधनुष (Prism, Dispersion and Rainbow)

प्रिज़्म से प्रकाश का अपवर्तनश्वेत प्रकाश का विक्षेपण और इंद्रधनुष

वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकीर्णन (Atmospheric Refraction and Scattering)

वायुमंडलीय अपवर्तन—तारों की टिमटिमाहटप्रकाश का प्रकीर्णन—नीला आकाश और रक्ताभ सूर्य
📝 अध्याय का सारांश (Chapter Summary)
💡 टिप (Tip)
इस अध्याय के दो हिस्से हैं—नेत्र वाला हिस्सा लेंस की क्षमता के सवालों पर टिका है, जहाँ P = 1/f और f मीटर में लेना है; और आकाश वाला हिस्सा एक ही नियम पर—कम तरंगदैर्ध्य का प्रकाश अधिक प्रकीर्ण होता है। नीला आकाश, रक्ताभ सूर्य और खतरे का लाल संकेत—तीनों उत्तर इसी एक वाक्य से निकलते हैं।

अध्याय की प्रश्नावली (Chapter Exercise)

पहले प्रश्न स्वयं हल करें। फिर उत्तर खोलकर चरण मिलाएँ।

अध्याय 11 की प्रश्नावली (भाग 1)14 सवाल · चरणबद्ध उत्तरअध्याय 11 की प्रश्नावली (भाग 2)9 सवाल · चरणबद्ध उत्तर