सही विकल्प: (B) समंजन
फोकस दूरी को समायोजित करके निकट तथा दूर की वस्तुओं को फोकसित करने की क्षमता ही समंजन कहलाती है।
शेष तीनों विकल्प दृष्टि दोष हैं, क्षमता नहीं। सही विकल्प (B) समंजन।
सही विकल्प: (D) दृष्टिपटल
अभिनेत्र लेंस प्रकाश को नेत्र के पीछे की कोमल झिल्ली पर फोकसित करता है।
यह झिल्ली दृष्टिपटल कहलाती है और वहीं वास्तविक तथा उलटा प्रतिबिंब बनता है। सही विकल्प (D)।
सही विकल्प: (C) 25 cm
सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी को ही निकट बिंदु कहते हैं।
सामान्य वयस्क नेत्र के लिए यह लगभग 25 cm होती है। सही विकल्प (C)।
सही विकल्प: (C) पक्ष्माभी द्वारा
पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़कर या फैलकर लेंस की वक्रता बदल देती हैं।
वक्रता बदलने से ही फोकस दूरी बदलती है। सही विकल्प (C)।
क्षमता और फोकस दूरी का संबंध है P = 1/f, इसलिए f = 1/P और f मीटर में मिलता है।
दूर की दृष्टि के लिए f = 1/(−5.5) ≈ −0.18 m, यानी लगभग −18 cm।
निकट की दृष्टि के लिए f = 1/(+1.5) ≈ +0.67 m, यानी लगभग +67 cm।
उत्तर: दूर की दृष्टि के लिए लगभग −0.18 m का अवतल लेंस और निकट की दृष्टि के लिए लगभग +0.67 m का उत्तल लेंस चाहिए।
निकट-दृष्टि दोष में लेंस को अनंत पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब नेत्र के अपने दूर बिंदु पर बनाना होता है।
इसलिए लेंस की फोकस दूरी दूर बिंदु की दूरी के बराबर, ऋण चिह्न सहित होगी—f = −80 cm = −0.8 m।
क्षमता P = 1/f = 1/(−0.8) = −1.25 D।
उत्तर: इस दोष के संशोधन के लिए −1.25 डाइऑप्टर क्षमता का अवतल लेंस चाहिए।
चित्र में दो स्थितियाँ दिखाइए—पहली में 25 cm पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब दृष्टिपटल के पीछे बनता दिखाइए, और दूसरी में उत्तल लेंस लगाकर प्रतिबिंब दृष्टिपटल पर आता दिखाइए।
संशोधक उत्तल लेंस को 25 cm पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब नेत्र के अपने निकट बिंदु, यानी 1 m पर बनाना है।
इसलिए u = −25 cm = −0.25 m और v = −1 m लीजिए।
लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f से 1/f = 1/(−1) − 1/(−0.25) = −1 + 4 = 3।
इससे f = 1/3 m और क्षमता P = 1/f = +3.0 D।
उत्तर: इस दोष को संशोधित करने के लिए +3.0 डाइऑप्टर क्षमता का उत्तल लेंस चाहिए।