📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)पानी ऊँचाई से नीचे की ओर बहता है। आवेश भी अपने आप नहीं बहता—उसे बहाने के लिए एक अंतर चाहिए।
यही अंतर विभवांतर है, और उसे बनाए रखने का काम सेल या बैटरी करती है।
🧠 समझिए (Understand)किसी विद्युत परिपथ में इलेक्ट्रॉनों को गति देने के लिए सेल अथवा बैटरी का उपयोग किया जाता है। सेल के भीतर होने वाली रासायनिक अभिक्रिया उसके दोनों टर्मिनलों के बीच विभवांतर उत्पन्न करती है।
दो बिंदुओं के बीच विद्युत विभवांतर (Potential difference) एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य के बराबर होता है, यानी V = W/Q।
विभवांतर का SI मात्रक वोल्ट (V) है, जो इटली के भौतिकविज्ञानी अलेसान्द्रो वोल्टा के नाम पर रखा गया है।
यदि एक कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में एक जूल कार्य करना पड़े तो उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर एक वोल्ट होता है, यानी 1 V = 1 J/C।
विभवांतर की माप वोल्टमीटर से की जाती है और उसे सदा उन्हीं दो बिंदुओं के पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है जिनके बीच विभवांतर मापना है।
उदाहरण 1 (Example 1) — 1 वोल्ट का अर्थयह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V है?
विभवांतर की परिभाषा है V = W/Q, यानी एकांक आवेश को ले जाने में किया गया कार्य।
1 V का अर्थ है कि एक कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में एक जूल कार्य करना पड़ता है।
इसीलिए 1 वोल्ट = 1 जूल प्रति कूलॉम लिखा जाता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — बैटरी से मिली ऊर्जा6 V बैटरी से गुज़रने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?
विभवांतर का अर्थ ही है प्रति कूलॉम आवेश को दी गई ऊर्जा।
W = V × Q से, यहाँ V = 6 V और Q = 1 C।
W = 6 × 1 = 6 जूल, यानी हर कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा दी जाती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)वोल्टमीटर को श्रेणीक्रम में लगाया जाता है। ❌
वोल्टमीटर सदा उन्हीं बिंदुओं के पार्श्वक्रम में लगता है जिनके बीच विभवांतर मापना है।
वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में लगता है, ऐमीटर श्रेणीक्रम में।