दिक्सूचक की सुई स्वयं एक छोटा छड़ चुंबक है, जिसके अपने उत्तर और दक्षिण ध्रुव होते हैं।
चुंबक के पास लाने पर उसके चुंबकीय क्षेत्र के कारण सुई के ध्रुवों पर बल लगता है—सजातीय ध्रुवों में प्रतिकर्षण और विजातीय ध्रुवों में आकर्षण।
उत्तर: इसी बल के कारण सुई घूमकर क्षेत्र की दिशा में आ जाती है, यानी विक्षेपित हो जाती है।
पहले छड़ चुंबक बनाकर उसका एक सिरा N और दूसरा S अंकित कीजिए।
अब उत्तर ध्रुव से निकलकर बाहर की ओर घूमती हुई और दक्षिण ध्रुव में प्रवेश करती हुई वक्र रेखाएँ खींचिए, जिन पर तीर का निशान लगाइए।
इन्हीं रेखाओं को चुंबक के भीतर दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर पूरा कर दीजिए, जिससे हर रेखा एक बंद वक्र बन जाए।
उत्तर: ध्रुवों के पास रेखाएँ पास-पास और बीच में दूर-दूर दिखाइए, क्योंकि ध्रुवों के पास क्षेत्र सबसे प्रबल होता है। अध्याय के चित्र को देखकर बनाइए।
चुंबक के बाहर क्षेत्र रेखाएँ उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर तथा भीतर दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर होती हैं।
हर क्षेत्र रेखा एक बंद वक्र होती है।
जहाँ रेखाएँ पास-पास होती हैं वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल और जहाँ दूर-दूर होती हैं वहाँ दुर्बल होता है।
उत्तर: कोई भी दो क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं, और किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा वहाँ क्षेत्र की दिशा बताती है।
किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा वही होती है जो वहाँ रखी दिक्सूचक की सुई के उत्तर ध्रुव की दिशा है, और वह एक ही हो सकती है।
यदि दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करतीं तो उस बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं और सुई को एक साथ दोनों ओर संकेत करना पड़ता।
उत्तर: यह असंभव है, इसलिए दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।