सही विकल्प: (D) चुंबकीय क्षेत्र की संकेंद्री क्षेत्र रेखाओं का केंद्र तार होता है
सीधे धारावाही तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ वृत्त होती हैं।
इन वृत्तों का केंद्र वही तार होता है और तार से दूर जाने पर वे बड़े होते जाते हैं। सही विकल्प (D)।
सही विकल्प: (C) कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है
प्रेरण में कुंडली से जुड़ा चुंबकीय क्षेत्र बदलता है और उसी से धारा प्रेरित होती है।
विकल्प (B) तो धारा का चुंबकीय प्रभाव है, प्रेरण नहीं। सही विकल्प (C)।
सही विकल्प: (A) जनित्र
गैल्वेनोमीटर और ऐमीटर मापक यंत्र हैं और मोटर विद्युत ऊर्जा का उपभोग करती है।
यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत धारा उत्पन्न करने वाली युक्ति जनित्र है। सही विकल्प (A)।
सही विकल्प: (D) ac जनित्र में सर्पी वलय होते हैं जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है
दोनों का सिद्धांत एक ही है—वैद्युतचुंबकीय प्रेरण; अंतर केवल वलयों का है।
सर्पी वलय से प्रत्यावर्ती धारा और विभक्त वलय वाले दिक्परिवर्तक से दिष्ट धारा मिलती है। सही विकल्प (D)।
सही विकल्प: (C) बहुत अधिक बढ़ जाता है
लघुपथन में विद्युन्मय तथा उदासीन तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं और परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है।
I = V/R के अनुसार प्रतिरोध घटते ही धारा बहुत बढ़ जाती है। सही विकल्प (C)।
(a) गलत है—विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है, उलटा काम जनित्र करता है।
(b) सही है—जनित्र वैद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर ही कार्य करता है।
(c) सही है—कुंडली के केंद्र पर बड़े वृत्तों के चाप सरल रेखाओं जैसे प्रतीत होते हैं।
(d) गलत है—हरे विद्युतरोधन वाला तार भूसंपर्क तार होता है; विद्युन्मय तार का विद्युतरोधन लाल होता है।
उत्तर: (a) और (d) गलत हैं; (b) तथा (c) सही हैं।