किसी भी ऊर्जा स्रोत का दोहन पर्यावरण में किसी न किसी रूप में विक्षोभ अवश्य उत्पन्न करता है।
सौर सेल जैसी युक्तियों का प्रचालन प्रदूषण मुक्त जरूर है, पर उन्हें बनाने की प्रक्रिया में पर्यावरण को क्षति पहुँच चुकी होती है।
इसी तरह जल विद्युत कोई उत्सर्जन नहीं करती, पर बाँध बनाने से पारितंत्र नष्ट होते हैं और लोग विस्थापित होते हैं।
उत्तर: इसलिए कोई भी स्रोत पूर्णतः प्रदूषण मुक्त नहीं है; सही कथन यही है कि कौन-सा स्रोत किस दूसरे की अपेक्षा अधिक स्वच्छ है।
हाइड्रोजन के जलने पर केवल जल बनता है, कोई कार्बन युक्त उत्पाद नहीं निकलता।
CNG में मुख्यतः मेथैन होती है, इसलिए उसके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, जो हरितगृह गैस है।
हाइड्रोजन का कैलोरी मान भी CNG से कहीं अधिक है।
उत्तर: हाँ, हाइड्रोजन CNG की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन है; पर उसका भंडारण तथा परिवहन कठिन और महँगा होने के कारण उसका व्यापक उपयोग अभी नहीं हो पाया है।
पहला स्रोत सौर ऊर्जा है, क्योंकि सूर्य अगले लगभग पाँच अरब वर्षों तक ऊर्जा विकिरित करता रहेगा और उसके समाप्त होने की चिंता व्यावहारिक रूप से नहीं है।
दूसरा स्रोत पवन ऊर्जा है, क्योंकि पवन सूर्य के कारण होने वाले वायुमंडलीय तापन से लगातार बनती रहती है।
उत्तर: ये दोनों स्रोत उपयोग करने पर घटते नहीं और इनका पुनर्जनन स्वयं प्रकृति करती रहती है, इसीलिए ये नवीकरणीय हैं। जैवमात्रा तथा जल विद्युत भी इसी वर्ग में आते हैं।
पहला स्रोत कोयला है, जो करोड़ों वर्षों में बना और जिसके भंडार सीमित हैं; वर्तमान दर से उपयोग करते रहने पर वह कुछ सौ वर्षों में समाप्त हो जाएगा।
दूसरा स्रोत पेट्रोलियम है, जिसकी स्थिति भी ठीक वैसी ही है।
उत्तर: इन दोनों का पुनर्जनन मानव जीवनकाल जैसी अवधि में संभव नहीं है, इसलिए ये समाप्य अथवा अनवीकरणीय स्रोत हैं। यूरेनियम भी इसी वर्ग में आता है।