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TRE2 — भाषा सामान्य अध्ययन और Sanskrit

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प्रश्न-पत्र निर्देश

150 प्रश्न · 150 अंक · 2 घंटे 30 मिनट

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प्रश्न 101
‘गृहपतिः’ पदस्य समासविग्रहः स्यात्
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सही उत्तर: (C) गृहस्य पतिः
‘गृहपतिः’ का विग्रह ‘गृहस्य पतिः’ है—यह षष्ठी तत्पुरुष समास है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 102
‘राज्ञः पुरुषः’ इत्यस्य समस्तपदमस्ति
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सही उत्तर: (A) राजपुरुषः
‘राज्ञः पुरुषः’ का समस्त पद ‘राजपुरुषः’ बनता है, जहाँ समास में विभक्ति का लोप हो जाता है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 103
‘शतावली’ पदे समासोऽस्ति
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सही उत्तर: (A) द्विगुः
‘शतावली’ में पहला पद संख्यावाचक ‘शत’ है और समस्त पद समूह का बोध कराता है, इसलिए यह द्विगु समास है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 104
‘कुरुकर्मा’ पदे समासोऽस्ति
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सही उत्तर: (B) बहुव्रीहिः
‘कुरुकर्मा’ में कोई पद प्रधान नहीं; समस्त पद किसी तीसरे का बोध कराता है—यानी वह जिसका कर्म क्रूर हो। इसलिए यह बहुव्रीहि समास है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 105
‘दिवारात्रम्’ पदस्य समासविग्रहः स्यात्
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘दिवारात्रम्’ का शुद्ध विग्रह ‘दिवा च रात्रिः च तयोः समाहारः’ होगा। दिए गए तीनों विग्रहों में विभक्तियाँ अशुद्ध हैं, इसलिए उत्तर ‘इनमें से कोई नहीं’ है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 106
‘वदत्’ पदे प्रकृति-प्रत्ययौ स्तः
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सही उत्तर: (C) वद् + शतृ
‘वदत्’ = ‘वद्’ + ‘शतृ’। ‘शतृ’ परस्मैपदी धातुओं में वर्तमान कृदंत बनाता है; आत्मनेपदी में ‘शानच्’ आता है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 107
‘कारकः’ पदे प्रत्ययोऽस्ति
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सही उत्तर: (B) पुल्
‘कारकः’ में ‘ण्वुल्’ प्रत्यय है, जो ‘अक’ के रूप में दिखता है—करने वाला। ‘तृच्’ लगने पर ‘कर्ता’ बनता है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 108
भाववाचकसंज्ञाविज्ञापयितुं प्रत्ययः प्रयुज्यते
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सही उत्तर: (C) त्व
भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए ‘त्व’ प्रत्यय लगता है—जैसे ‘मनुष्य’ से ‘मनुष्यत्व’, ‘गुरु’ से ‘गुरुत्व’।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 109
धातुना विशेषणं निर्मातुं धातुना सह प्रत्ययः प्रयुज्यते
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सही उत्तर: (D) एकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
धातु से विशेषण यानी कृदंत बनाने के लिए ‘शतृ’ और ‘शानच्’—दोनों प्रत्यय लगते हैं, इसलिए उत्तर ‘एक से अधिक’ है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 110
‘जडता’ पदे प्रत्ययोऽस्ति
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘जडता’ में ‘तल्’ प्रत्यय है, जो भाववाचक संज्ञा बनाता है और ‘ता’ के रूप में दिखता है। दिए गए तीनों प्रत्यय गलत हैं, इसलिए उत्तर ‘इनमें से कोई नहीं’ है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 111
अव्ययानि भवन्ति
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सही उत्तर: (C) त्रिषु लिङ्गेषु सदृशानि
अव्यय वे शब्द हैं जिनका रूप नहीं बदलता—तीनों लिंगों, तीनों वचनों और सब विभक्तियों में वे एक-से रहते हैं।

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प्रश्न 112
असंगत-युग्ममस्ति
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सही उत्तर: (D) एकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
दिए गए युग्मों में एक से अधिक मेल गलत हैं—‘नायकः’ का ‘भूतपूर्वः’ और ‘चोरयम्’ का ‘करणीयः’ से कोई संगति नहीं बनती, इसलिए उत्तर ‘एक से अधिक’ है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 113
प्रवृत्तिसाराः खलु माहात्म्याः गिरः इत्यत्र खलु अव्ययस्य अर्थोऽस्ति
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सही उत्तर: (A) निश्चयः
यहाँ ‘खलु’ निश्चय के अर्थ में आया है—‘निश्चय ही’। यह अव्यय बल देने के लिए प्रयुक्त होता है।

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प्रश्न 114
आवां भ्रमावः इत्यस्य कर्मवाच्यमस्ति
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘भ्रम्’ अकर्मक धातु है, इसलिए उसका कर्मवाच्य नहीं बनता—भाववाच्य बनेगा ‘आवाभ्यां भ्रम्यते’। दिए गए तीनों रूप अशुद्ध हैं।

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प्रश्न 115
मम मित्रं चलचित्रं पश्यति इत्यस्य कर्मवाच्यमस्ति
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सही उत्तर: (B) मम मित्रेण चलचित्रं दृश्यते
कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया में और कर्म प्रथमा में आता है, इसलिए शुद्ध रूप ‘मम मित्रेण चलचित्रं दृश्यते’ है।

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प्रश्न 116
ते मम मित्राः सन्ति इत्यस्य शुद्धरूपं भवेत्
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सही उत्तर: (A) ते मम मित्राणि सन्ति
‘मित्र’ नपुंसकलिङ्ग है, इसलिए उसका बहुवचन ‘मित्राणि’ बनता है—‘मित्राः’ नहीं। इसी कारण पहला वाक्य ही सही माना गया है।

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प्रश्न 117
राधा मात्रा सह अस्ति—रेखाङ्किते शुद्धरूपं भवेत्
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘सह’ के साथ तृतीया विभक्ति आती है और ‘मातृ’ का तृतीया एकवचन ‘मात्रा’ ही है। वाक्य में यह रूप पहले से शुद्ध है, इसलिए बदलने की आवश्यकता नहीं।

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प्रश्न 118
कर्मवाच्ये कर्म भवति
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सही उत्तर: (C) प्रथमाविभक्तौ
कर्मवाच्य में कर्म प्रथमा विभक्ति में आ जाता है और कर्ता तृतीया में चला जाता है।

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प्रश्न 119
‘श्रु’ धातोः लङ्लकारे मध्यमपुरुषस्य द्विवचनमस्ति
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सही उत्तर: (B) अश्रुणुतम्
‘श्रु’ धातु लङ् लकार, मध्यमपुरुष, द्विवचन में ‘अशृणुतम्’ बनता है।

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प्रश्न 120
‘अस्’ धातोः विधिलिङ्लकारे मध्यमपुरुषस्य बहुवचनमस्ति
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सही उत्तर: (B) स्यात
‘अस्’ धातु विधिलिङ् लकार, मध्यमपुरुष, बहुवचन में ‘स्यात’ बनता है। ‘स्यात्’ प्रथमपुरुष एकवचन का रूप है।

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प्रश्न 121
‘ब्रू’ धातोः लट्लकारे प्रथमपुरुषस्य बहुवचनमस्ति
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सही उत्तर: (C) आहुः
‘ब्रू’ धातु लट् लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन में ‘आहुः’ बनता है। यही रूप विकल्पों में दो बार छप गया है।

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प्रश्न 122
‘हन्’ धातोः लोट्लकारे मध्यमपुरुषस्य एकवचनमस्ति
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सही उत्तर: (A) जहि
‘हन्’ धातु लोट् लकार, मध्यमपुरुष, एकवचन में ‘जहि’ बनता है।

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प्रश्न 123
‘इष्’ धातोः लट्लकारे प्रथमपुरुषस्य एकवचनमस्ति
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘इष्’ धातु लट् लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन में ‘इच्छति’ बनता है, जो दिए गए किसी विकल्प में नहीं है।

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प्रश्न 124
‘पति’ शब्दस्य चतुर्थी एकवचनस्य रूपमस्ति
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सही उत्तर: (B) पत्ये
‘पति’ शब्द की चतुर्थी एकवचन में ‘पत्ये’ रूप बनता है—यह शब्द विशेष रूप से चलता है।

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प्रश्न 125
‘अहन्’ शब्दस्य सप्तमीबहुवचने रूपमस्ति
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘अहन्’ का सप्तमी बहुवचन ‘अहःसु’ बनता है (कुछ ग्रंथों में ‘अहस्सु’ भी मिलता है)। विकल्पों में एक ही रूप दो बार छप गया है, इसलिए कुंजी में ‘इनमें से कोई नहीं’ रखा गया है।

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प्रश्न 126
‘एनं’ कस्य शब्दस्य रूपमस्ति?
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सही उत्तर: (A) इदम्
‘एनम्’ ‘इदम्’ शब्द का ही रूप है, जो अन्वादेश में—यानी पहले कही गई वस्तु का फिर उल्लेख करते समय—प्रयुक्त होता है।

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प्रश्न 127
७३ (73) इत्यस्य कृते संख्यापदमस्ति
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सही उत्तर: (A) त्रिसप्ततिः
73 के लिए संस्कृत संख्यापद ‘त्रिसप्ततिः’ है।

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प्रश्न 128
‘स्थितः’ पदे प्रत्ययः कः?
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सही उत्तर: (C) क्त
‘स्थितः’ में ‘क्त’ प्रत्यय है, जो भूतकालिक कृदंत बनाता है—ठहरा हुआ।

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प्रश्न 129
पूर्वरूपविधायकं सूत्रमस्ति
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सही उत्तर: (B) एङः पदान्तादति
पूर्वरूप का विधान करने वाला सूत्र ‘एङः पदान्तादति’ है, जिससे पदांत ‘ए/ओ’ के बाद ‘अ’ का लोप होकर अवग्रह लगता है।

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प्रश्न 130
माहेश्वरसूत्रेषु अन्तस्थवर्णानां क्रमः कः?
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सही उत्तर: (A) य् व् र् ल्
माहेश्वर सूत्रों में अन्तःस्थ वर्णों का क्रम ‘य् व् र् ल्’ है—यही ‘यण्’ प्रत्याहार बनाता है।

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प्रश्न 131
‘विष्णुः वैकुण्ठमावसति’ इत्यत्र वैकुण्ठे द्वितीयाविभक्तेः कारणमस्ति
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सही उत्तर: (C) उपान्वध्याङ्वसः
‘उपान्वध्याङ्वसः’ सूत्र के अनुसार ‘वस्’ धातु के साथ अधिकरण द्वितीया में आता है, इसलिए ‘वैकुण्ठम्’ द्वितीया में है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 132
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (A) लता गीतं शृण्वती नृत्यति
‘लता’ स्त्रीलिंग एकवचन है, इसलिए कृदंत का स्त्रीलिंग रूप ‘शृण्वती’ और क्रिया ‘नृत्यति’ आएगी—यही पहला वाक्य है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 133
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (A) शिष्यं व्याकरणं बोधयति
‘बोधयति’ द्विकर्मक क्रिया है, इसलिए शिष्य और व्याकरण—दोनों द्वितीया में आएँगे: ‘शिष्यं व्याकरणं बोधयति’।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 134
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (C) बालकोऽध्यापकात् पुस्तकं पठति
जिससे सीखा जाए, उसमें ‘आख्यातोपयोगे’ सूत्र से पञ्चमी आती है, इसलिए शुद्ध रूप ‘बालकः अध्यापकात् पुस्तकं पठति’ है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 135
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (A) श्वेतोऽश्वो धावति
विशेषण अपने विशेष्य के लिंग, वचन और विभक्ति का अनुसरण करता है। ‘अश्वः’ प्रथमा में है, इसलिए ‘श्वेतः’ भी प्रथमा में—संधि के बाद ‘श्वेतोऽश्वो धावति’।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 136
“अहं शुचि जलं पेयम्”—अस्य वाक्यस्य शुद्धरूपमस्ति
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सही उत्तर: (B) मया शुचि जलं पेयम्
‘पेयम्’ कृत्य प्रत्यय वाला रूप है, इसलिए कर्ता तृतीया में आएगा—‘मया’—और कर्म प्रथमा में—‘जलम्’। अतः ‘मया शुचि जलं पेयम्’।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 137
“अध्ययनात् पराजयते”—अस्मिन् वाक्ये ‘अध्ययनात्’ इत्यत्र पञ्चमीविभक्तेः कारणमस्ति
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘पराजेरसोढः’ सूत्र से यहाँ पञ्चमी आई है, क्योंकि अध्ययन वह है जिसे सहा न जा सके। दिए गए तीनों सूत्र गलत हैं, इसलिए उत्तर ‘इनमें से कोई नहीं’ है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 138
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (C) तण्डुलान् ओदनं पचति
‘पच्’ द्विकर्मक है, इसलिए चावल और भात—दोनों द्वितीया में आएँगे: ‘तण्डुलान् ओदनं पचति’।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 139
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (B) योगाय याति
किसी उद्देश्य के लिए जाना हो तो ‘तादर्थ्ये चतुर्थी’ से चतुर्थी आती है, इसलिए ‘योगाय याति’ शुद्ध है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 140
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘ईर्ष्या’ के साथ चतुर्थी आती है, इसलिए शुद्ध रूप ‘हरये ईर्ष्यति’ होगा—जो दिए गए किसी विकल्प में नहीं है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 141
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (B) कति जनाः पठन्ति
‘कति’ के साथ बहुवचन आता है, इसलिए ‘कति जनाः पठन्ति’ शुद्ध है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 142
शुद्धं शब्दं चिनुत—
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सही उत्तर: (B) द्वाराः
‘अक्षि’ के शुद्ध रूप ‘अक्ष्णोः’ और ‘अक्षिणी’ बनते हैं, इसलिए पहला और तीसरा विकल्प अशुद्ध हैं। शेष में ‘द्वाराः’ ही शुद्ध शब्द-रूप है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 143
“स ताः पश्यति”—वाक्यस्य कर्मवाच्यं भवति
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सही उत्तर: (E) न कोऽपि उपयुक्तः
‘स ताः पश्यति’ का कर्मवाच्य ‘तेन ताः दृश्यन्ते’ बनता है—कर्ता तृतीया में और कर्म प्रथमा बहुवचन में, जिससे क्रिया भी बहुवचन हो जाती है। कुंजी में ‘इनमें से कोई नहीं’ दिया गया है, जो छपे विकल्पों के रूप पर आधारित है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 144
“रामेण रावणः अहन्यत”—वाक्यस्य कर्तृवाच्यं भवति
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सही उत्तर: (B) रामः रावणम् अहन्
कर्तृवाच्य में कर्ता प्रथमा में और कर्म द्वितीया में आएगा, और क्रिया लङ् लकार में—‘रामः रावणम् अहन्’।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 145
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (C) दम्पती पुत्रं इच्छतः
‘दम्पती’ द्विवचन है, इसलिए क्रिया भी द्विवचन में आएगी—‘इच्छतः’। अतः ‘दम्पती पुत्रं इच्छतः’ शुद्ध है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 146
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (D) एकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
‘मया पाठः पठनीयः’ और ‘अस्माभिः पाठाः पठनीयाः’—दोनों वाक्यों में कर्ता तृतीया में और कर्म प्रथमा में ठीक-ठीक आया है, इसलिए उत्तर ‘एक से अधिक’ है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 147
“गावः तृणानि भक्षयन्ते”—वाक्यस्य कर्तृवाच्यं भवति
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सही उत्तर: (B) गौः तृणानि भक्षयति
‘भक्षयन्ते’ कर्मवाच्य का रूप है। कर्तृवाच्य में क्रिया परस्मैपद में आएगी और कर्ता के वचन से मेल खाएगी—दिए गए विकल्पों में केवल ‘गौः तृणानि भक्षयति’ में यह मेल ठीक है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 148
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
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सही उत्तर: (A) अहं अनुवाक्रोशीत्
‘अनुक्रुश्’ के साथ कर्म द्वितीया में आता है और कर्ता प्रथमा में ही रहता है, इसलिए ‘अहं अनुवाक्रोशीत्’ ही शुद्ध है।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 149
“सः मह्यं धनम् अददात्”—वाक्यस्य कर्मवाच्यं भवति
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सही उत्तर: (A) तेन मह्यं धनम् अदयत
कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया में आएगा और क्रिया कर्म के अनुसार—‘तेन मह्यं धनम् अदयत’।

1 अंक · 2023 · सेट A
प्रश्न 150
“वयं सर्वे स्वप्यामः”—वाक्यस्य भाववाच्यं भवति
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सही उत्तर: (C) अस्माभिः सर्वैः स्वप्यते
‘स्वप्’ अकर्मक है, इसलिए भाववाच्य बनेगा: कर्ता तृतीया में और क्रिया सदा एकवचन में—‘अस्माभिः सर्वैः स्वप्यते’।

1 अंक · 2023 · सेट A
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